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ट्राईबल बेल्ट की 3000 बीघा जमीन महाबल सीमेंट कंपनी को लीज पर, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार

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ट्राईबल बेल्ट की 3000 बीघा जमीन महाबल सीमेंट कंपनी को लीज पर, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार

गुवाहाटी: असम सरकार ने दीमा हसाओ जिले के आदिवासी बहुल इलाके में करीब 3000 बीघा जमीन महाबल सीमेंट कंपनी को 30 साल की लीज पर आवंटित की। स्थानीय आदिवासियों ने इस फैसले का कड़ा विरोध जताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। गुवाहाटी हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजय कुमार मेधी ने इस जमीन आवंटन पर तीखी नाराजगी प्रकट की और पूछा कि 3000 बीघा का मतलब जिले के आधे हिस्से के बराबर है, क्या यह उचित है? कोर्ट ने इस क्षेत्र के संवैधानिक और पर्यावरणीय महत्व पर बल दिया।

दीमा हसाओ जिला संविधान की छठवीं अनुसूची के अंतर्गत शामिल है, जो आदिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा करता है। यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से भी संवेदनशील है, जहां गर्म पानी के झरने, प्रवासी पक्षी और वन्यजीव निवास करते हैं। कोर्ट ने नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनॉमस काउंसिल (NCHAC) को जमीन आवंटन के सभी दस्तावेज और नीति अदालत में पेश करने का आदेश दिया है।

स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन से बेदखली के खिलाफ याचिका दायर की है, वहीं कंपनी ने अपने व्यावसायिक कामकाज में बाधा डालने वाले गैरकानूनी तत्वों से सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका लगाई है। कंपनी के वकील जी गोस्वामी ने कहा कि यह जमीन विधिवत टेंडर प्रक्रिया के तहत 30 साल की लीज पर दी गई है, जबकि स्थानीय अधिवक्ताओं ने जमीन से आदिवासियों की जबरन निकाली को असंवैधानिक बताया है।

अदालत इस पूरी प्रक्रिया की गहन समीक्षा कर रही है और अगली सुनवाई 1 सितंबर को निर्धारित की गई है। यह मामला आदिवासी अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन की एक चुनौती बनकर उभरा है।