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7th Day of Bhojshala Survey : भोजशाला के सर्वे के 7वें दिन गोपाल शर्मा ने भोजशाला का टायटल बदलने का दावा किया!

भोजशाला के आसपास जब भी खेतों में हल चलते हैं तो मूर्तियां निकलती है!

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7th Day of Bhojshala Survey : भोजशाला के सर्वे के 7वें दिन गोपाल शर्मा ने भोजशाला का टायटल बदलने का दावा किया!

 

 

धार से छोटू शास्त्री की रिपोर्ट

 

Dhar : भोजशाला का 7वें दिन का सर्वे भी पूरा हो गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद एएसआई की टीम हिन्दू मुस्लिम पक्षकारों और मजदूरों के साथ लगातार भोजशाला के सर्वे में जुटी है। यह सर्वे पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। 7वें दिन का सर्वे सुबह 8 बजे से शुरू हुआ जो कि शाम साढे चार बजे तक जारी रहा और इसके बाद सर्वे की टीम भोजशाला से रवाना हुई। साथ ही हिन्दू मुस्लिम पक्षकार के लोग भी भोजशाला से बाहर आए।

हिंदू पक्ष की ओर से सर्वे में शामिल हुए गोपाल शर्मा ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से सर्वे जारी है। सर्वे के तहत भोजशाला के पिछले वाले हिस्से में खुदाई की जा रही है। साथ ही भोजशाला के चारों तरफ 50 मीटर की परिधि की मेपिंग कर वहां भी सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया। वहीं मुस्लिम पक्षकार अब्दुल समद के राजा भोज के किले पर सवालिया निशान उठाने पर गोपाल शर्मा ने कहा कि सांच को आंच क्या, सर्वे में सब कुछ सामने आ जाएगा। भोजशाला के आसपास जब भी खुदाई होती है तो मूर्तियां निकलती है या खेतों में हल चलाते हैं तो मूर्तियां निकलती है यह सारी गाथाएं भोजशाला की ही है। मैं फिर कहता हूं कि जिस तरह अयोध्या और मथुरा, काशी का टायटल बदला है भोजशाला का भी टायटल बदलेगा।

महाराजा भोज सेवा संस्थान के गोपाल शर्मा ने कहा कि आज सुबह 8 बजे चालू हुआ सर्वे सवा 4 बजे समाप्त हुआ। रोज की तरह काम चल रहा है ऐसा कुछ नहीं निकला कि मैं बताकर उत्साहित हूं। लेकिन, सर्वे पॉजिटिव दिशा में चल रहा है और आने वाले समय में कुछ नया दिखने को भी मिलेगा। अभी तो बेस ही तैयार हुआ है। निश्चित ही कामों में गति आएगी। कुछ पाइंट नोट हो गए है। अलग-अलग मशीनों से जांच चल रही है। आज छत पर भी जांच हुई है और पीछे की ओर नए स्थानों पर भी पाइंट लगाए गए है। दो लोग नई टीम में शामिल हुए है। वे सर्वे की अलग विधा के होंगे। अपनी अपनी विधा साथ लेकर आए है।

उन्होंने बताया कि ये तो सबको पता था कि राजा भोज 10वीं शताब्दी के थे। कमाल मौलाना तो कमलनाथ महाराज की समाधि है जिस पर शिवलिंग बना हुआ था। कहते है कि उस समय नाथ समुदाय का पूरा शहर हुआ करता था। काल भैरव सिद्ध क्षेत्र था। इसलिए जितनी भी समाधि है, वह नाथ समुदाय की बनाई हुई थी। 437 समाधि नगर में नाथ समुदाय की है। ये तो कमलनाथ महाराज की समाधि है। काल भैरव के पुजारी नाथ थे और यह तो इतिहास में लिखा हुआ है, यह उनकी समाधि है। उस पर शिवलिंग था। अब यह इनकी हो गई। ये जिस कमाल मौलाना की बात कर रहे है, उनकी मजार तो अहमदाबाद में बनी हुई है। अपना देखना का तरीका है, सांच को आंच क्या। हम तो कह रहे है उस स्थान का सर्वे कर लो जो सत्य होगा सामने जाएगा। गोपाल शर्मा ने बताया कि जब कलेक्टर राजेश राजोरा थे, तब अक्कल कुईया के पास से 10 टन की विष्णु भगवान की प्रतिमा निकली थी जो आज भी मांडव के जहाज महल में रखी हुई है। ये सर्वे भोजशाला के लिए नींव का पत्थर साबित होगा।