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Push the Plane: 100 करोड़ का प्लेन खरीदने वाले 5 लाख का ट्रेक्टर नहीं ख़रीद पा रहे थे!

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Push the Plane: 100 करोड़ का प्लेन खरीदने वाले 5 लाख का ट्रेक्टर नहीं ख़रीद पा रहे थे!

पिछली बार जलते विमान का अनुभव साझा किया था इस बार एक और वायुयान कथा .माया महाठगिनी मानने वाले हम लोग सत्ता को भी माया की बहन ही मानते हैं.माया की सत्ता की तरह ही सत्ता की माया भी अपरम्पार है .सत्ता जब खुश हो तो सुदामा की कुटिया महल हो जाती है और रूठ जाये तो महलों में चमगादड़ बसेरा बना लेते हैं .तब मैं आयुक्त हाथकरघा और हस्त शिल्प था और वीआई पी रोड पर गौहर महल में एक हस्त शिल्प मेले में मौजूद था .तभी मेरा मोबाइल बजा .मेरे प्रमुख सचिव का फ़ोन था .राजीव आप को अभी तत्काल आयुक्त विमानन का प्रभार लेना है .सर मैं कल ले लूँ तो …क्योंकि अभी 6:30 हो रहा है और मुझे यहाँ से निकलने में एक घंटा लगेगा .

नहीं भई अभी पालन प्रतिवेदन भेजना है …उन्होंने गंभीर स्वर में कहा .तब सर प्रभार ग्रहण के कागज आप यहीं भेज दीजिये, मैं यहीं हस्ताक्षर कर प्रभार ले लूँगा -मैंने सुझाया .ओके मैं वहीं कागज भेजता हूँ।

फ़ोन रखकर मैं सोचने लगा कि क्या घटनाक्रम घटा होगा कि प्रमुख सचिव जो विमानन के भी प्रमुख सचिव हैं और आयुक्त विमानन का प्रभार भी देख रहे हैं, अचानक इस प्रभार से क्यों मुक्त किये जा रहे हैं ?

प्रश्न कई थे पर कौन उनके उत्तर देता ? कुछ देर में उनका दूत कागज लेकर आया .साथ में सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश भी था जिसमे प्रमुख सचिव के स्थान पर मुझे आयुक्त विमानन बनाया गया था .मुझे अजीब लग रहा था .मैं अपने प्रमुख सचिव को पसंद करता था इसलिये भी अच्छा नहीं लगा .घर आया तो टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ चल रही थी कि प्रमुख सचिव को हटाकर मुझे अतिरिक्त प्रभार दिया गया है .आजकल यही रीत है आपका स्थानांतरण नहीं होता आप हटाये जाते हैं.मेरा कार्यभार और दौड़ भाग दोनों बढ़ गई थी .अपने तीन दफ़्तरों में तालमेल बैठाने पूरे समय दौड़ता रहता .दिन मृगनयनी के प्रबंध संचालक के कार्यालय से शुरू होता .दोपहर हथकरघा में और शाम विमानन में .

विमानन में एक प्लेन ख़रीदना था .कुछ पायलट भर्ती करने थे .कुछ वर्षों से उलझे मामले थे .मज़े की बात ये कि दीये के ठीक नीचे गहरा अंधेरा था .जहाँ से लगभग रोज़ ही सरकार का मुखिया उड़ान भरता हो वहाँ घनघोर अव्यवस्था और अराजकता थी .पायलट बिना वर्दी थे ,विमान खुले में खड़ा रहता था जहाँ उसकी सुरक्षा को ख़तरा था .विमान को हैंगर में ले जाने के लिये कर्मचारी हाथ से धकेलते थे जबकि कोई वाहन उसे खींचने के लिये वांछित था .सौ पचास करोड़ का प्लेन ख़रीदने वाले पाँच लाख का ट्रेक्टर नहीं ख़रीद पा रहे थे .राजकीय विमानतल के भवन के निरीक्षण में मुझे ढेरों मरे हुए कबूतर सड़ते हुए मिले .राजनीतिक स्थिरता भी सुशासन की गारंटी नहीं दे पा रही यह स्पष्ट था .सकारात्मक पहल करते हुए सभी पायलटों और स्टाफ़ को प्रेरित कर सुधार प्रारंभ किया .पायलट अब वर्दी में थे .उनकी जायज़ बातें सुनी जा रहीं थीं .कर्मचारी भी मनोयोग से काम करने लगे .शासन को आवश्यक प्रस्ताव फुर्ती से जाने लगे .परिसर चमकने लगा .

तभी एक दिन मेरा फ़ोन फिर बजा .प्रमुख सचिव ने बताया …राजीव आपको तत्काल प्रभार छोड़ना है .यस सर-कहकर मैंने आदेश आते ही पुनः उन्हीं प्रमुख सचिव को प्रभार सौंप दिया .कई प्रश्न उठे पर उनके उत्तर किससे माँगता .मुझे तो सुविधा ही हुई भागदौड़ कम हुई .घर आया तो टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ थी कि मुझे हटाया गया .