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Denial of Promotion Will Affect Pay Scale : कर्मचारियों का प्रमोशन से इंकार, तो पे-स्केल में खेल, हाईकोर्ट से बड़ा झटका!

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Denial of Promotion Will Affect Pay Scale : कर्मचारियों का प्रमोशन से इंकार, तो पे-स्केल में खेल, हाईकोर्ट से बड़ा झटका!

जानिए, इस फैसले से प्रमोशन ठुकराने वाले कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा!

Indore : यदि कोई सरकारी कर्मचारी पदोन्नति लेने से इंकार करता है, तो वह क्रमोन्नति के साथ ही टाइम बाउंड पे-स्केल का लाभ भी नहीं उठा सकेगा। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने यह फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने कहा कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी प्रमोशन से इंकार करता है, तो उसे क्रमोन्नति और समयबद्ध वेतनमान का लाभ नहीं मिलेगा। हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की फुल बेंच ने यह फैसला सुनाया।

यह मामला इंदौर खंडपीठ में विचाराधीन था, जिसमें सवाल उठाया गया था कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी पदोन्नति लेने से मना करता है, तो क्या उसे समयमान वेतनमान और क्रमोन्नति का लाभ मिलना चाहिए? इससे पहले, हाई कोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाया था कि पदोन्नति से इंकार के बावजूद कर्मचारी को दी गई क्रमोन्नति वापस नहीं ली जा सकती। इसी तर्क को आधार बनाकर याचिकाकर्ता रमेशचंद्र पेमनिया ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

वहीं कोर्ट ने इस पूरे मामले में याचिकाकर्ता के विभिन्न तर्कों को देखते हुए मामले में यह आदेश दिया कि यदि कोई कर्मचारी पदोन्नति लेने से मना करता है, तो वह न तो क्रमोन्नति का हकदार होगा और न समयबद्ध वेतनमान का लाभ दिया जाएगा।

कोर्ट में ये था राज्य सरकार का तर्क

राज्य शासन ने कोर्ट में तर्क दिया कि समयमान वेतनमान और क्रमोन्नति की नीति के तहत, यदि कोई कर्मचारी स्वयं पदोन्नति लेने से इंकार करता है, तो उसे भविष्य में पदोन्नति या वेतन वृद्धि का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए। राज्य शासन का यह तर्क हाई कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। वहीं अधिवक्ता आनंद अग्रवाल का कहना है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार पदोन्नति और समयमान वेतनमान दोनों अलग-अलग हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी यह फैसला दिया था कि प्रमोशन और समयमान वेतनमान अलग-अलग होते हैं। इसलिए भले ही कर्मचारी प्रमोशन से इंकार कर दे लेकिन वेतनमान और क्रमोन्नति नहीं रोकी जा सकती।

सरकारी कर्मियों पर क्या होगा फैसले का प्रभाव

हाई कोर्ट के इस फैसले का सीधा प्रभाव प्रदेश के सभी सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा। अब यदि कोई कर्मचारी पदोन्नति लेने से इनकार करता है, तो उसे भविष्य में किसी भी प्रकार की वेतन वृद्धि या पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलेगा। यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका है। क्योंकि, इससे उनकी वेतन संबंधी योजनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है।