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Paddy Procurement Scam : कागजों पर धान खरीदी कर करोड़ों की अफरा-तफरी

कटनी में घोटाला सामने आने के बाद, पूरे प्रदेश में जांच होगी

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Paddy Procurement Scam : कागजों पर धान खरीदी कर करोड़ों की अफरा-तफरी

Katni : धान खरीदी में यहाँ करोड़ों का फर्जीवाड़ा सामने आया है। कटनी से इस घोटाले की शुरुआती परतें खुलने के बाद अब इसके तार प्रदेश के दूसरे जिलों में भी पहुंच सकते हैं। कटनी जिले में धान खरीदी केंद्रों से सांठगांठ करके राइस मिलर्स ने सरकार को करीब 6 करोड़ रुपए की चपत लगाई।

जांच अधिकारी के मुताबिक घोटाला 9 करोड़ तक हो सकता है। गोपनीय शिकायत के बाद हुई कार्रवाई में कई राइस मिलर्स और खरीदी केंद्रों के कर्मचारियों पर FIR दर्ज की गई। मामला सामने आने के बाद अब प्रदेश भर में धान खरीदी में बड़ी गड़बड़ी की आशंका पैदा हो गई।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव फैज अहमद किदवई ने गोपनीय शिकायत मिलने पर जांच के निर्देश दिए थे इसके बाद नागरिक आपूर्ति निगम (रीवा) के जिला प्रबंधक संजय सिंह, नागरिक आपूर्ति निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक (जबलपुर) एलएल अहिरवार, जिला आपूर्ति अधिकारी (कटनी) बालेंद्र शुक्ला और कटनी प्रबंधक मधुर खर्द ने दो दिन तक मामले की जांच की।

Paddy Procurement Scam

Paddy Procurement Scam : कागजों पर धान खरीदी कर करोड़ों की अफरा-तफरी

मामले में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव फैज़ अहमद किदवई ने जानकारी दी कि गोपनीय शिकायत के आधार पर कटनी में जांच की गई। इसके बाद करोड़ों की गड़बड़ी का खुलासा हुआ। असल में घोटाला कितना बड़ा है, यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। लेकिन, कटनी का मामला गंभीर है। अब हम पूरे प्रदेश में इसे लेकर जांच करवा रहे हैं।

मामले में DSP शालिनी परस्ते ने जानकारी दी कि नागरिक आपूर्ति एवं खाद्य निगम के जिला प्रबंधक ने कटनी की शिकायत पर माधव नगर थाने और कुठला थाने में रोहरा इंडस्ट्रीज, गुरु नानक इंडस्ट्रीज़ और अन्य पर धारा 407 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कैसे किया गया ये घोटाला

धान खरीदी केंद्र से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को जानकारी भेजी जाती है कि केंद्र पर कितनी धान खरीदी गई। विभाग द्वारा इस आधार पर मिलर को डिलीवरी ऑर्डर जारी किया जाता है। इस ऑर्डर के आधार पर मिलर केंद्र से धान उठा लेता है। धान उठा लेने के बाद विभाग की ओर से स्वीकृति पत्र जारी किया जाता है।

इस आधार पर किसानों को भुगतान कर दिया जाता है। जबकि, कटनी के 17 खरीदी केंद्रों से विभाग को धान खरीदी की जो जानकारी भेजी गई, वो फर्जी थी। धान वास्तव में खरीदी ही नहीं गई बल्कि सिर्फ कागजों पर ही धान खरीदी हुई और कागजों पर ही धान मिल तक भी पहुंच गई। जांच में पाया गया कि न तो किसान से धान खरीदी गई, न धान मिलर द्वारा उठाई गई, ये सब सिर्फ कागजों पर सीमित था।

Paddy Procurement Scam : कागजों पर धान खरीदी कर करोड़ों की अफरा-तफरी

जांच अधिकारी और नागरिक आपूर्ति निगम रीवा के जिला प्रबंधक संजय सिंह ने जानकारी दी, कि करीब 7 करोड़ 67 लाख रुपए का भुगतान था। इसमें करीब 70% धान मौके पर थी ही नहीं। यानी करीब 6 करोड़ रुपए का घोटाला होने की आशंका है। बारीकी से जांच की जाए तो घोटाला करीब 9 करोड़ तक का हो सकता है।

इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन, माल भाड़ा, तुलाई, बारदाना समेत और भी कई मद हैं जिनमें घोटाला हुआ है। करीब 24 हजार तो बारदाना है, जिसका हिसाब नहीं है। मामले की जांच अभी जारी है।

कार्रवाई जो की गई

जांच में पाया गया कि खरीदी गई धान मिलर के परिसर में होनी चाहिए थी। लेकिन धान कम थी। बारीकी से जांच करने पर पाया गया कि फर्जी किसानों के नाम पर धान खरीदी की गई। धान खरीदी में खरीदी केंद्र के सदस्यों और राइस मिलर्स ने मिलकर कागजों में ही खरीदी कर ली। जिले के 7 मिलर्स और 17 धान खरीदी केंद्र प्रभारियों की भूमिका संदिग्ध है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान किसानों से बिना धान लिए ही कागजों में करोड़ों रुपए का धान खरीदकर सरकार को नुकसान पहुंचाने का ये बड़ा मामला है।

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जांच के बाद पाया कि रोहरा इंडस्ट्रीज के प्रोप्राइटर बंटु रोहरा और उबरा धान खरीदी केंद्र के सहायक प्रबंधक अनुज सिंह रघुवंशी, प्रभारी भूपत द्विवेदी, ऑपरेटर नितेश तिवारी ने सांठगांठ करते हुए कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। जांच में पाया गया कि 17 समितियों में फर्जी किसानों के नाम पर 4286.7 मीट्रिक टन धान की फर्जी तरीके से कागजों में ही खरीदी की गई! कुल मिलाकर करीब 9 करोड़ रुपए के घोटाले का अंदेशा है।