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Allegation of False Recognition : इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के संचालक सुरेश भदौरिया पर फर्जी मान्यता दिलाने का आरोप, FIR के बाद फरार!

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Allegation of False Recognition : इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के संचालक सुरेश भदौरिया पर फर्जी मान्यता दिलाने का आरोप, FIR के बाद फरार!

40 से अधिक कॉलेज मान्यता के इस फर्जीवाड़े में शामिल, डॉक्टर और मरीज सब नकली!

Indore : घोटाले और फर्जीवाड़े के मामले में सीबीआई ने छापे के बाद इंडेक्स कॉलेज के मालिक सुरेश भदौरिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इसके बाद से ही सुरेश भदौरिया को फरार बताया जा रहा है। सीबीआई टीम ने दूसरी बार कॉलेज से जुड़े लोगों के यहां जांच-पड़ताल की। इस दौरान टीम ने कई दस्तावेज जब्त किए। सीबीआई मामले को हर तरह से जांचकर पता लगा रही है, कि भदौरिया ने खुद के कॉलेज में फर्जीवाड़ा करने के साथ और कितने कॉलेजों की मदद की और पैसे लेकर उनकी मान्यता का नवीनीकरण करवाया है।

पिछले दिनों सीबीआई की टीम ने 6 प्रदेशों के 40 ठिकानों पर छापे मारे थे। इस दौरान कई लोगों के खिलाफ मामले भी दर्ज किए गए। इनमें इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के मालिक सुरेश भदोरिया पर भी शामिल हैं। केस दर्ज होते ही इंडेक्स कॉलेज के मालिक सुरेश भदोरिया गायब हो गए। सीबीआई की टीम उनके कॉलेज से संबंधित कई लोगों के यहां पर जांच पड़ताल करने के लिए भी पहुंची।

बताया जा रहा कि इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रार महाकाल सिंह चंदेल के तीन ठिकानों पर भी सीबीआई के आठ सदस्यों की टीम ने सर्चिंग की। टीम ने कॉलेज और मान्यताओं से संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं।

रावतपुरी मेडिकल कॉलेज से खुला फर्जीवाड़ा

सीबीआई की जांच छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज से शुरू हुई थी। यहीं से देशभर में फैले मेडिकल कॉलेजों के नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि 40 से अधिक कॉलेज मान्यता के इस फर्जीवाड़े में शामिल हैं। इसी दौरान इंडेक्स मेडिकल कॉलेज का नाम भी सामने आया।

भदौरिया सहित 35 लोगों पर धोखाधड़ी का केस

सीबीआई ने रिश्वत लेकर मेडिकल कॉलेजों को मनमाफिक मान्यता दिलवाने के मामले में इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन सुरेश भदौरिया सहित 35 लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। भदौरिया पर आरोप हैं कि वे मेडिकल कॉलेजों के चेयरमैन और डायरेक्टर से 3 से 5 करोड़ रुपए लेकर मनमाफिक मान्यता दिलवाते थे। भदौरिया ने कॉलेज में अस्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति की और एनएमसी निरीक्षण के वक्त उन्हें स्थायी फैकल्टी बताया। इसके लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम में फिंगरप्रिंट क्लोन कर फर्जी थंब इंप्रेशन बनाए गए और रेगुलर अटेंडेंस दर्शाई गई।