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Kishore Wadhwani’s Property Attached : ED ने किशोर वाधवानी की करोड़ों की प्रापर्टी अटैच की, रिश्तेदारों पर भी शिकंजा कसा!

अटैच संपत्तियों का वर्तमान मूल्य ₹20 करोड़ से अधिक बताया जा रहा!

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Kishore Wadhwani’s Property Attached : ED ने किशोर वाधवानी की करोड़ों की प्रापर्टी अटैच की, रिश्तेदारों पर भी शिकंजा कसा!

Indore : प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने गुटका कारोबारी किशोर वाधवानी की करोड़ो की प्रापर्टी अटैच कर दी। साथ ही उनके रिश्तेदार नितेश वाधवानी व अन्य की भी संपत्ति अटैच की गई। अटैच संपत्ति की कीमत ₹11.33 करोड़ है और इसमे बाजार मूल्य 20 करोड़ से ज्यादा बताया गया।

ईडी ने बताया कि किशोर वाधवानी, नितेश वाधवानी, पूनम वाधवानी और मेसर्स दबंग दुनिया पब्लिकेशंस प्रालि पर पीएमएलए एक्ट 2022 के तहत 11.33 करोड़ की संपत्ति जमीन, फ्लैट आदि अचल संपत्तियों को अस्थाई तौर पर कुर्क (अटैच) किया गया। यह कार्रवाई डीजीजीआई द्वारा ग्रुप पर ‘ऑपरेशन कर्क’ के तहत की गई। यह कार्रवाई इसी मामले में थाना तुकोगंज में कराई गई एफआईआर के तहत हुई।

बताया जा रहा कि इसी केस के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। छापे के बाद डीजीजीआई ने वाधवानी सहित 21 लोगों को 1946 करोड़ का टैक्स नोटिस दिया था। इसमें वाधवानी व अन्य पर एक ही साल में 500 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी के आरोप थे।

पुलिस ने तुकोगंज थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 88/2021 में किशोर व नीतेश वाधवानी के खिलाफ 420 का केस दर्ज कराया था। इसी मामले में मई माह में दबंग दुनिया के सीईओ पंकज मजेपुरिया को भी गिरफ्तार किया गया था।

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इस केस में हाईकोर्ट जल्द जांच पूरी करने के आदेश पुलिस को दे चुका है। मूल केस किशोर वाधवानी और नितेश वाधवानी के खिलाफ डीजीजीआई ने दर्ज कराया था। डीजीजीआई (डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस) भोपाल की इंदौर यूनिट के आवेदन पर इंदौर तुकोगंज थाने में वाधवानी और उनके भतीजे नीतेश वाधवानी के खिलाफ 10 फरवरी 2021 में चार सौ बीसी व अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर हुई थी।

वाधवानी की रिव्यू पिटीशन खारिज की

इस मामले को निरस्त लगाने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन लगाया था जो 13 मार्च 2025 को खारिज हो गया। इस आदेश के खिलाफ वाधवानी ने रिव्यू पिटीशन लगाई थी, इसे भी खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट जस्टिस विनोद रुसिया और जस्टिस गजेंद्र सिंह ने फैसले में लिखा कि ऐसे कोई भी नए तथ्य याचिकाकर्ता नहीं बता सकें कि क्यों रिव्यू किया जाए। यह प्रोसेस ऑफ।लॉ का मिसयूज है और इसके लिए उन पर 20 हजार की कास्ट लगाते हुए याचिका खारिज की जाती है।