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कैंसर नहीं तोड़ सका मुस्कान की रोशनी: नफीसा अली की प्रेरक यात्रा

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कैंसर नहीं तोड़ सका मुस्कान की रोशनी: नफीसा अली की प्रेरक यात्रा

 

कुछ चेहरे सिर्फ सुंदर नहीं होते, वे साहस की परिभाषा बन जाते हैं। नफीसा अली ऐसा ही एक नाम हैं, जिनकी मुस्कान में जीवन की जिजीविषा चमकती है। जब शरीर थक जाता है तो हिम्मत बोलती है, और यही हिम्मत नफीसा की पहचान है। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी का यह लेख उसी अदम्य नफीसा अली के साहस, संवेदना और उम्मीद की कहानी है, एक ऐसी औरत की गाथा जो बीमारी से नहीं बल्कि उससे लड़ने की अपनी इच्छा से पहचानी जाती है।

*नफीसा अली सोढ़ी, आपकी हिम्मत की दाद देता हूं…*

– डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी

68 की उम्र में भी भूतपूर्व मिस इंडियायों को खूबसूरती में मात देने वाली नफीसा अली स्टेज 4 पेरिटोनियल कैंसर से दूसरी बार संघर्ष कर रही हैं। नफीसा अली को पहली बार नवंबर 2018 में स्टेज 3 पेरिटोनियल और ओवेरियन कैंसर का निदान हुआ। उन्होंने कीमोथेरेपी से लड़ाई लड़ी और 2021 तक कैंसर रिमिशन में चली गईं। नवंबर 2018 में गोवा में रहते हुए उन्हें पेट दर्द और असामान्य थकान महसूस हुई। डॉक्टरों ने शुरू में इसे टीबी समझ लिया और गलत इलाज दिया, जिससे बीमारी और फैल गई। नफीसा ने खुद कहा, “मुझे पता था कि यह कैंसर है, लेकिन डॉक्टरों ने गलत डायग्नोस किया।” सही निदान के बाद पता चला कि यह स्टेज 3 पेरिटोनियल और ओवेरियन कैंसर था। उन्होंने तुरंत कीमोथेरेपी शुरू की, जो बेहद विषाक्त और दर्दनाक प्रक्रिया थी।

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दूसरी बार उन्हें सितंबर 2025 में स्टेज 4 पेरिटोनियल कैंसर का निदान हुआ। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपडेट शेयर किया कि सर्जरी संभव नहीं, इसलिए कीमोथेरेपी फिर से शुरू की है। वे कहती हैं, “मैं जीवन से प्यार करती हूं और यह नया अध्याय है।” उनकी सकारात्मकता सभी के लिए प्रेरणा है। हाल ही में उन्होंने अपनी 89 साल की मां का बर्थडे नाती-पोतों के साथ गोवा में मनाया था।

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नफीसा अली की खूबसूरती उम्र की दीवारों को चकमा देती है। उनकी मुस्कान बेहद मधुर और मदिर है। उनकी त्वचा पर जीवन की चमक है, कीमो के बाद भी, बाल्ड लुक में भी, विग के साथ भी। उन पर लाखों लोग अब भी फ़िदा हैं। उनकी आँखें समंदर हैं, गहरे, शांत, लेकिन जब हंसती हैं तो तूफान सा उठता है। और होंठ मुश्किल में भी प्यार बरसाते हैं। लोग कहते हैं, खूबसूरती का राज तो उनकी हिम्मत में है। जिस औरत ने स्टेज-4 कैंसर को चुनौती दी, कीमो के जहर को पिया और फिर इंस्टाग्राम पर पोतियों के साथ हंसते हुए फोटो डाली, वो औरत अगर सुंदर न हो, तो सुंदरता का मतलब ही क्या।

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उनका चेहरा कोई मेकअप नहीं, बल्कि संघर्ष से चमक रहा है। उनकी मुस्कान कोई लिपस्टिक नहीं, बल्कि जीत की रौशनी है। मुझे उनमें सबसे आकर्षक लगता है उनका एप्रोच। उन्होंने योग, ध्यान, फिटनेस और परिवार के सहयोग पर जोर दिया। कैंसर जागरूकता के लिए अपनी कहानी शेयर की, जो महिलाओं के स्वास्थ्य में लापरवाही के खिलाफ चेतावनी बनी। वे कहती हैं, “कैंसर ने मुझे सिखाया कि जीवन का हर पल महत्वपूर्ण है।”

 

सितंबर 2025 में PET स्कैन से पता चला कि उनका कैंसर वापस आ गया है और अब स्टेज 4 हो चुका है। यह लीवर, गॉल ब्लैडर और पैंक्रियास तक फैल चुका है। सर्जरी संभव नहीं, इसलिए कीमोथेरेपी फिर से शुरू की गई। कीमो के साइड इफेक्ट्स में बाल झड़ने लगे। अपनी पोतियों की मदद से बाल कटवाए और बाल्ड लुक अपनाया। इंस्टाग्राम पर फोटोज शेयर कीं, कैप्शन लिखा, “Positive Power”। वे कहती हैं, “कीमो विषाक्त है, लेकिन मैं अपने शरीर से कहती हूं- इस यात्रा का आनंद लो और कैंसर को हराओ।”

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मुझे भरोसा है कि सोनाली बेंद्रे, मनीषा कोइराला, लिसा रे, ताहिरा कश्यप, किरण खेर, गौतमी ताडिमल्ला आदि की तरह नफीसा अली भी कैंसर पर विजयी होंगी। वे असाधारण शख्स हैं। नफीसा अली 1972 से 1974 तक राष्ट्रीय तैराकी चैंपियन रहीं। 1976 में उन्होंने ईव्स वीकली मिस इंडिया का खिताब जीता और मिस इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दूसरा रनर-अप बनीं। 1978 में श्याम बेनेगल की फिल्म ‘जुनून’ से फिल्मों में आईं। इसके बाद उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और मलयालम सिनेमा में काम किया।

 

2004 में वे राजनीति में आईं, साउथ कोलकाता से लोकसभा चुनाव लड़ा, हार गईं। 2009 में समाजवादी पार्टी से लखनऊ सीट पर चुनाव लड़ीं। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुईं और वर्तमान में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सदस्य हैं। नफीसा अली ने एड्स जागरूकता कैंपेन चलाए और अपनी कैंसर यात्रा साझा कर अन्य मरीजों को प्रेरित किया। लॉकडाउन के दौरान गोवा में स्थानीय मुद्दों पर आवाज उठाईं, जैसे सब्जी विक्रेताओं को आवासीय क्षेत्रों में अनुमति। वे APPNA नामक अपना बुटीक चलाती हैं, जो परिवार के नाम पर आधारित है और जिसकी आय से सामाजिक कार्यों को फंड करती हैं।

 

नफीसा अली गोवा में रहती हैं। वे सोशल मीडिया पर गोवा के समुद्र तटों और स्थानीय मुद्दों की तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। नफीसा की यात्रा सिर्फ संघर्ष की नहीं बल्कि आशा और जागरूकता की है। वे कहती हैं कि कैंसर की प्रारंभिक जांच के लक्षणों (जैसे पेट दर्द) को नजरअंदाज न करें, स्वास्थ्य में लापरवाही घातक हो सकती है। योग, ध्यान, परिवार का सहयोग और सकारात्मक सोच से लड़ें। भाई-बहनों और दोस्तों का बंधन सबसे बड़ा हथियार है।

नफीसा की यह लड़ाई हमें सिखाती है कि कैंसर अंत नहीं बल्कि नया अध्याय हो सकता है। शुभकामनाएं नफीसा अली, आप एक योद्धा हैं। इंस्टा पर आपको बाल्ड लुक में देखा जो टॉप की मॉडल और हीरोइनों को मात देता है। आपकी जीत के लिए दुआएं।