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गोवा की आग – कर्णधारों का दायित्व 

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गोवा की आग – कर्णधारों का दायित्व 

-एन के त्रिपाठी

गोवा के नाइट क्लब में हुए अग्निकांड में 25 व्यक्तियों की दुखद मृत्यु हो गई। नाइट क्लब के मालिक लूथरा बन्धुओं ने क़ानून तोड़ने की सभी सीमाओं को तोड़ दिया। आश्चर्यजनक है कि शासन के किसी भी विभाग की कोई स्वीकृति उनके पास नहीं थी। ज़मीन से लेकर बार लाइसेंस तक उनके पास नहीं था। आपदा के समय लूथरा बंधु भागकर थाईलैंड पहुँच गये। इसके बाद उनकी खोज ख़बर और धर पकड़ पर TV चैनल्स केंद्रित हो गयीं। अच्छा हुआ कि अपराधियों को पकड़ने में पुलिस को सफलता मिली और इन्हें भारत वापस लाया जा रहा है।

जहाँ लूथरा बंधुओं का जघन्य अपराध अक्षम्य है, वहीं यह प्रश्न भी उठना चाहिए कि वह कौन सी व्यवस्था थी जिसमें ये लोग निरापद रूप से नाइटक्लब खुलेआम चलाकर पैसा लूट रहे थे। नाइटक्लब से सीधे या परोक्ष रूप से अनेक विभाग सम्बंधित हैं। इनके छोटे बड़े सरकारी अफ़सरों और कर्मचारियों की आपराधिक लापरवाही और खुली मिलीभगत के बिना इस नाइट क्लब का चलना असंभव था। दुर्भाग्यवश यह प्रकरण अब मुख्य रूप से पुलिस की विवेचना और न्यायालयीन कार्रवाई तक सिमट कर रह जाएगा और वास्तविक शासकीय प्रणाली के ज़िम्मेदार लोग, जो इस अवैध व्यापार से लाभान्वित थे, वे लगभग साफ़ बच निकलेंगे। प्रारंभ में यह समाचार आया था कि स्थानीय पंचायत ने इस क्लब को धराशायी करने के आदेश दिए थे, परंतु डायरेक्टर पंचायत द्वारा अज्ञात कारणों से आदेश स्थगित कर दिया गया था। मीडिया में समाचार आते ही उन्हें निलंबित कर दिया गया।

गोवा सरकार द्वारा उत्तरी गोवा के कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जाँच समिति बनायी गई है। इसमें उनके अतिरिक्त दक्षिण गोवा के पुलिस अधीक्षक, निर्देशक फॉरेंसिक साइंस तथा उप निदेशक फ़ायर सर्विसेज़ सदस्य हैं। इस जाँच समिति के गठन से स्पष्ट है कि यह प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के तह में न जाकर केवल आग लगने के कारणों आदि की ही जाँच करेगी। आग किस प्रकार लगी इसकी जानकारी उतनी आवश्यक नहीं है जितनी कि व्यवस्था में दोषियों का पता लगाना है। इस नाइटक्लब के मालिक की 42 शैल कम्पनियां हैं। शैल कंपनी चलने देने की ज़िम्मेदारी क्या किसी पर है? गत वर्ष पूना में पोर्श कार दुर्घटना में दो आईटी प्रोफेशनल्स की मृत्यु हो गई थी। घटना से संबंधित दो पुलिस अधिकारियों को सेवा से निकाल दिया गया है जिन्होंने समय पर वरिष्ठ अधिकारियों और कंट्रोल रूम को सूचना नहीं दी थी। गोवा के अग्निकांड में सरकारी लापरवाही उससे कहीं अधिक विशाल है। देखना होगा कि इसमें क्या कार्रवाई होती है अथवा पूर्व परंपरा अनुसार सख़्त कार्रवाही की बयानबाज़ी के पश्चात सभी संबंधित अधिकारियों पर केवल सांकेतिक कार्यवाही कर अभय संरक्षण दे दिया जाएगा।