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ED-NIA की कार्रवाई: खैर लकड़ी तस्करी से आतंकी फंडिंग की जांच तेज, आलीराजपुर क्षेत्र की भूमिका भी एजेंसियों की नजर में

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ED-NIA की कार्रवाई: खैर लकड़ी तस्करी से आतंकी फंडिंग की जांच तेज, आलीराजपुर क्षेत्र की भूमिका भी एजेंसियों की नजर में

राजेश जयंत

ALIRAJPUR : खैर लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी से अर्जित धन के संभावित आतंकी वित्तपोषण से जुड़े नेटवर्क को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा हाल के दिनों में कई राज्यों में की गई संयुक्त व समानांतर जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि खैर लकड़ी की तस्करी से अर्जित धन का उपयोग कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

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▫️इसी जांच श्रृंखला के तहत प्रवर्तन निदेशालय ने 11 दिसंबर 2025 को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के अंतर्गत बहु-राज्यीय तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान लगभग 9.7 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी और कीमती संपत्तियां जब्त की गईं, जबकि 25 बैंक खातों को फ्रीज किया गया। यह कार्रवाई महाराष्ट्र के पाडघा-बोरिवली क्षेत्र, दिल्ली, कोलकाता, झारखंड के हजारीबाग, प्रयागराज, दमन और रत्नागिरी सहित कई स्थानों पर की गई।

▪️पाडघा मॉड्यूल और खैर तस्करी का एंगल

▫️जांच एजेंसियों के अनुसार महाराष्ट्र के पाडघा क्षेत्र में सक्रिय एक कट्टरपंथी मॉड्यूल का नाम जांच में बार-बार सामने आया है। जांच में यह निष्कर्ष निकलकर आया है कि यह समूह आरक्षित वन क्षेत्रों से खैर लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी के जरिए धन अर्जित कर रहा था। इसी धन के एक हिस्से के आतंकवादी गतिविधियों में उपयोग की आशंका को लेकर वित्तीय लेन-देन, हवाला नेटवर्क और संदिग्ध खातों की गहन पड़ताल की जा रही है।

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▪️ED की कार्रवाई से जुड़ता है मामला

▫️प्रवर्तन निदेशालय की 11 दिसंबर 2025 की कार्रवाई इसी व्यापक जांच का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें खैर लकड़ी तस्करी से अर्जित धन के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं। एजेंसियों का मानना है कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि तस्करी से प्राप्त धन के अंतिम उपयोग को समझने की प्रक्रिया है।

 

इसी कारण बैंक खातों, नकद प्रवाह और संपत्तियों की जब्ती की गई है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि अवैध कमाई कहां और किन उद्देश्यों के लिए उपयोग की गई।

▪️आलिराजपुर कनेक्शन की पड़ताल

▫️खैर तस्करी से जुड़े पुराने मामलों और स्थानीय स्तर पर सामने आए तथ्यों के कारण आलीराजपुर जिले की भूमिका भी जांच एजेंसियों के रडार पर है। पूर्व में गुजरात और मध्यप्रदेश की संयुक्त कार्रवाई में आलीराजपुर क्षेत्र के सागवान डिपो में खैर लकड़ी के ट्रांजिट स्टॉक की बरामदगी के मामले सामने आ चुके हैं।

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इसी पृष्ठभूमि में यह जांच की जा रही है कि क्या खैर लकड़ी की तस्करी के नेटवर्क में आलिराजपुर किसी ट्रांजिट या स्टोरेज प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल हुआ। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय की 11 से 13 दिसंबर 2025 की आधिकारिक जानकारी में आलीराजपुर का नाम प्राथमिक तलाशी सूची में सीधे तौर पर शामिल नहीं है।

इसी कारण एजेंसियां इस कड़ी को अभी अपुष्ट मानते हुए अतिरिक्त दस्तावेजी साक्ष्य, वन विभाग की रिपोर्ट और स्थानीय प्रशासन के रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।

▪️संयुक्त कार्रवाई और बरामदगी

▫️इससे पहले गुजरात के वन विभाग और अन्य अधिकारियों की टीम ने आलीराजपुर पहुंचकर स्थानीय पुलिस सुरक्षा में सागवान डिपो से खैर लकड़ी की बरामदगी की थी। कार्रवाई के दौरान लकड़ी की मात्रा, प्रजाति की पुष्टि और परिवहन दस्तावेजों की जांच की गई थी। यह कार्रवाई भी उसी बड़े नेटवर्क की जांच का हिस्सा मानी जा रही है, जिसकी आर्थिक कड़ियां अब राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा खंगाली जा रही हैं।

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▪️जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष शेष

▫️एजेंसियों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी जिले या व्यक्ति को सीधे तौर पर आतंकी फंडिंग से जोड़ने से पहले ठोस और न्यायिक रूप से टिकाऊ प्रमाण जुटाए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खैर लकड़ी की तस्करी से अर्जित धन का उपयोग कहां और किस स्तर तक किया गया। फिलहाल यह मामला बहु-एजेंसी जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।