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दिल्ली में वायु प्रदूषण: सरकारी बयान ने बढ़ाई चिंता

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दिल्ली में वायु प्रदूषण: सरकारी बयान ने बढ़ाई चिंता

New Delhi: दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर हाल ही में संसद में दिए गए सरकारी बयान ने विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों में व्यापक नाराज़गी और चिंता पैदा कर दी है। संसद में प्रस्तुत उत्तर में कहा गया कि वायु प्रदूषण से फेफड़ों या स्वास्थ्य को नुकसान होने के ठोस प्रमाण नहीं हैं और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को ही आधारहीन बताया गया।

इस बयान के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे खारिज किया है। उनका कहना है कि उच्च वायु प्रदूषण विशेष रूप से सूक्ष्म कणों (PM2.5) के माध्यम से श्वसन और हृदय संबंधी रोगों के लिए प्रत्यक्ष खतरा बनता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने वाले बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों में सांस संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की घटनाएँ बढ़ जाती हैं।

 

दिल्ली‑NCR में सर्दियों में AQI अक्सर गंभीर या हानिकारक स्तर तक पहुंच जाता है। इस मौसम में सांस लेने में तकलीफ, आंखों और गले में जलन जैसी समस्याएं आम हैं और दीर्घकालिक रूप से फेफड़ों और हृदय पर असर पड़ता है।

नागरिकों का कहना है कि ऐसे बयान न केवल जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं, बल्कि नीति निर्माण और जवाबदेही पर भी सवाल उठाते हैं। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राजधानी भविष्य में रहने के लिए और अधिक असुरक्षित हो सकती है।

सरकार का बयान तकनीकी रूप से सही है कि “निर्णायक डेटा” अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन वास्तविकता यह है कि लगातार बढ़ता प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और इसके प्रभाव को नजरअंदाज करना लोगों की सुरक्षा और जीवन गुणवत्ता पर असर डालता है।