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भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता: जीएम सोयाबीन पर सरकार के रुख का सोपा ने किया स्वागत

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भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता: जीएम सोयाबीन पर सरकार के रुख का सोपा ने किया स्वागत

के के झा की रिपोर्ट

इंदौर: सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) ने भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार ढांचे में केंद्र सरकार द्वारा अपनाए गए किसानोन्मुखी रुख का स्वागत किया है।

एसोसिएशन ने विशेष रूप से सोयाबीन, सोयाबीन मील और अन्य आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) खाद्य एवं पशु आहार उत्पादों को व्यापार रियायतों से बाहर रखने के निर्णय की सराहना की है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल को भेजे गए पत्र में SOPA के चेयरमैन डॉ. डेविश जैन ने कहा कि यह फैसला घरेलू सोयाबीन मूल्य शृंखला की रक्षा करता है और देश के 50 लाख से अधिक सोयाबीन किसानों की आजीविका को सुरक्षित करता है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और राष्ट्रीय कृषि हितों के बीच संतुलन का स्पष्ट उदाहरण बताया।
SOPA ने पिछले वर्ष मंत्रालय को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपकर जीएम सोयाबीन उत्पादों के अनियंत्रित आयात से होने वाले गंभीर दुष्परिणामों अपनी चिंता प्रगट सरकार को अवगत कराया था। एसोसिएशन के अनुसार, ऐसे आयात भारतीय बाजार को अत्यधिक सब्सिडी प्राप्त वैश्विक प्रतिस्पर्धा के सामने असुरक्षित बना सकते हैं, जिससे कीमतों में अस्थिरता, किसानों की आय में गिरावट और तेलहन अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।

डॉ. जैन ने कहा कि सोयाबीन और सोयाबीन मील को व्यापार रियायतों से बाहर रखकर सरकार ने भारतीय कृषि के हित में एक स्पष्ट और मजबूत रेखा खींची है। इससे किसानों, प्रोसेसर्स और निर्यातकों सहित पूरे सोयाबीन क्षेत्र में विश्वास बढ़ा है।

एसोसिएशन ने कहा कि सोयाबीन भारत की खाद्य तेल और प्रोटीन सुरक्षा का एक रणनीतिक स्तंभ है और कई राज्यों में ग्रामीण रोजगार का आधार है। भारत के सख्त नॉन-जीएमओ नियामक ढांचे को बनाए रखना उपभोक्ता हितों और खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

हालांकि, सोयाबीन तेल और डीडीजीएस को व्यापार ढांचे में शामिल किए जाने पर SOPA ने प्रभावी निगरानी और कड़े नियामक प्रावधान लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। SOPA ने विश्वास जताया कि सरकार आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाएगी ताकि आयात से घरेलू तेलहन कीमतों और किसानों के हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।