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बड़वानी कोर्ट में बम अलर्ट, विशेषज्ञ टीम की कमी आई सामने, 90 किमी से बुलानी पड़ी टीम

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बड़वानी कोर्ट में बम अलर्ट, विशेषज्ञ टीम की कमी आई सामने, 90 किमी से बुलानी पड़ी टीम

बड़वानी : मध्य प्रदेश के बड़वानी जिला न्यायालय में बम की धमकी मिलने के बाद मचे हड़कंप के बीच बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) की भूमिका एक बार फिर बेहद अहम रूप में सामने आई है। इस घटना ने जहां सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर ला दिया, वहीं जिले में स्थायी बम निरोधक दस्ते की जरूरत को भी उजागर कर दिया है। घटना के बाद बड़वानी से 90 किलोमीटर दूर खरगोन से बम डिस्पोजल स्क्वॉड को बुलवाना पड़ा था।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार को 20 मार्च को प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश को तमिल भाषा में एक संदिग्ध ईमेल मिला, जिसमें कोर्ट परिसर में 15 जहरीले बम लगाए जाने और एक घंटे के भीतर विस्फोट की चेतावनी दी गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और एहतियात के तौर पर पूरे न्यायालय परिसर को तत्काल खाली कराया गया। आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा घेरा बनाकर आमजन की आवाजाही रोक दी गई।

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प्रारंभिक जांच डॉग स्क्वॉड की मदद से शुरू की गई, लेकिन बम जैसी संवेदनशील स्थिति से निपटने के लिए विशेषज्ञ टीम की आवश्यकता महसूस हुई। चूंकि बड़वानी जिले में बम डिस्पोजल स्क्वॉड उपलब्ध नहीं है, इसलिए करीब 90 किलोमीटर दूर खरगोन से BDDS टीम को बुलाया गया। टीम के पहुंचने के बाद ही पूरे परिसर की तकनीकी और व्यवस्थित जांच की गई।

बम डिस्पोजल स्क्वॉड एक विशेष प्रशिक्षित इकाई होती है, जो विस्फोटक पदार्थों की पहचान, उन्हें निष्क्रिय करने और सुरक्षित तरीके से निपटान करने में सक्षम होती है। इस टीम के पास बम सूट, एक्स-रे स्कैनर, रोबोटिक उपकरण और रिमोट कंट्रोल सिस्टम जैसे अत्याधुनिक संसाधन होते हैं। उनका काम बेहद जोखिमपूर्ण होता है और इसके लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की जरूरत होती है।

हालांकि विस्तृत जांच के दौरान कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ संसाधनों की उपलब्धता जरूरी है। पुलिस अधीक्षक पद्म विलोचन शुक्ला ने बताया कि BDDS यूनिट में महंगे उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की आवश्यकता होती है, इसलिए यह दल आमतौर पर दो-तीन जिलों के लिए एक ही स्थान पर तैनात रहता है।

दरअसल, मध्य प्रदेश में बम डिस्पोजल स्क्वॉड हर जिले में मौजूद नहीं है। राज्य के करीब 17 प्रमुख जिलों या मुख्यालयों में ही स्थायी BDDS यूनिट कार्यरत हैं, जबकि अन्य जिलों में जरूरत पड़ने पर नजदीकी जिले से टीम बुलाई जाती है।

बड़वानी कोर्ट में हुई यह घटना प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण सबक बनकर सामने आई है। इससे भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने और हर बड़े जिले में बम निरोधक दस्ते की तैनाती की जरूरत क बल मिला है।