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राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटाए गए राघव चड्ढा

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राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटाए गए  राघव चड्ढा

  सांसद डॉ अशोक कुमार मित्तल को राज्यसभा का डिप्टी लीडर बनाया गया

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपने नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है। उनकी जगह पर अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का उपनेता नियुक्त किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने गुरुवार को राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता के पद से हटाने का फैसला लिया। वहीं राघव चड्ढा की जगह अशोक मित्तल अब राज्यसभा में पार्टी की रणनीति और सदन के भीतर मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। पार्टी ने इस संबंध में राज्यसभा को लेटर भेजा है। हालांकि, राघव चड्ढा राज्यसभा में सांसद की भूमिका में सक्रिय रूप से बने रहेंगे।

पार्टी ने राघव चड्ढा को दिया मैसेज!

पिछले कुछ समय से आप के टॉप लीडर्स और राघव चड्ढा को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। दिल्ली शराब मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया जैसे पार्टी के टॉप लीडर्स के बरी होने पर राघव चड्ढा ने उनसे कोई मुलाकात नहीं की। साथ ही उन्होंने इस संबंध में सोशल मीडिया पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। जिससे कई तरह के कयासबाजी पहले से ही लगाए जा रही थी। ऐसे में राघव चड्ढा का राज्यसभा में कद कम करना पार्टी का अहम मैसेज माना जा रहा है।

पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार का दर्जा दिए जाने की मांग

पिछले काफी समय से राघव चड्ढा संसद में उन मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं, जो आम लोगों की दैनिक समस्याएं हैं। सोमवार, 30 मार्च को उन्होंने राज्यसभा में देश में पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार का दर्जा दिए जाने की मांग की और कहा कि बच्चों के लालन-पोषण की जिम्मेदारी सिर्फ मां की ही नहीं, बल्कि साझा दायित्व है।

उच्च सदन में विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाते हुए आप सदस्य ने कहा कि अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 15 दिनों के (पितृत्व) अवकाश का प्रावधान है लेकिन निजी क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के कुल कार्यबल का बडा हिस्सा निजी क्षेत्र में काम करता है।

आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने मंगलवार को संसद के उच्च सदन में न्यूनतम खाता शेष पर लगने वाले जुर्माने का मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से छोटे बैंक खातों पर इस तरह के शुल्क समाप्त करने का आग्रह करते हुए कहा कि ये शुल्क गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों पर असमान रूप से असर डालते हैं।