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मुख्यमंत्री डॉ.यादव का दूरदर्शी निर्णय: युवा IAS अधिकारी आदिवासी और ग्रामीण विकास के महत्वपूर्ण जिलों में सहायक कलेक्टर पदस्थ

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मुख्यमंत्री डॉ.यादव का दूरदर्शी निर्णय: युवा IAS अधिकारी आदिवासी और ग्रामीण विकास के महत्वपूर्ण जिलों में सहायक कलेक्टर पदस्थ

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का इसे दूरदर्शी निर्णय ही कहा जाएगा कि उन्होंने युवा IAS अधिकारियों को आदिवासी और महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास के जिलों में सहायक कलेक्टर के रूप में पदस्थ किया। दरअसल युवा अधिकारियों के लिए यह

जमीनी प्रशासन की सच्ची पाठशाला होगी।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार पुनः अपनी प्रशासनिक कुशलता और संवेदनशील नेतृत्व का परिचय देते हुए एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय लिया है। उन्होंने वर्ष 2025 बैच के 8 युवा IAS अधिकारियों की पहली पदस्थापना प्रदेश के आदिवासी और कम विकसित ग्रामीण जिलों में सहायक कलेक्टर के रूप में की है — और यह निर्णय न केवल प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक न्याय और जनसेवा की भावना का भी जीवंत प्रतीक है।

यह कोई सामान्य नियुक्ति नहीं, बल्कि एक सोची-समझी, सुनियोजित और अत्यंत सार्थक पहल है।

मुख्यमंत्री।का यह मानना है कि जो अधिकारी पहले दिन से ही कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, वंचित समुदायों की आकांक्षाओं और आदिवासी क्षेत्रों की जटिल प्रशासनिक चुनौतियों से रूबरू होगा, वही भविष्य में एक संवेदनशील, कर्मठ और जनहितकारी नौकरशाह बन सकेगा।

मध्यप्रदेश के आदिवासी जिले — जैसे मंडला, धार, झाबुआ, बड़वानी, बैतूल प्रशासन की सबसे कठिन परीक्षाभूमि हैं। यहाँ की दुर्गम पगडंडियाँ, वनाच्छादित क्षेत्र, आदिवासी संस्कृति की विविधता, और विकास की आवश्यकताएँ — ये सब मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार करती हैं, जहाँ एक युवा अधिकारी केवल किताबी ज्ञान से नहीं, बल्कि जमीनी अनुभव से सीखता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि वे चाहते हैं कि प्रदेश के नौकरशाह फाइलों के अधिकारी न बनकर जन-अधिकारी बनें — जो आम आदमी की पीड़ा को महसूस करें, उसकी समस्याओं को उसकी भाषा में समझें और उसके समाधान के लिए अथक परिश्रम करें।

यह पहल उन करोड़ों आदिवासी बंधु-भगिनियों के लिए भी एक उज्जवल संदेश है कि मध्यप्रदेश सरकार उनके विकास, उनके अधिकारों और उनकी समृद्धि के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस साहसिक, संवेदनशील और समाजोन्मुखी निर्णय का हृदय से स्वागत और अभिनंदन किया जाना चाहिए। यह निर्णय निश्चित रूप से मध्यप्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा।