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सिंधिया समर्थकों की अनदेखी

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सिंधिया समर्थकों की अनदेखी

भोपाल: सात साल पहले प्रदेश सरकार का तख्ता पलट कर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया अब अपने समर्थकों के बिखरने से बचाने में जुट गए हैं। हाल ही में हुए निगम, मंडल और प्राधिकरणों के विस्तार में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को इन नियुक्तियों में अपेक्षित जगह नहीं मिली है। सिंधिया इससे नाराज बताए जाते हैं। हालांकि इसे संगठन द्वारा खेमेबाजी को समाप्त करने के एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बताया गया है कि 65 महत्वपूर्ण पदों पर हुई नियुक्तियों में सिंधिया खेमे के महज दो चेहरों को स्थान देकर यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि अब सत्ता और संगठन में भागीदारी का आधार व्यक्तिगत पैरवी नहीं, बल्कि पार्टी के प्रति निस्वार्थ निष्ठा है।

_गुटबाजी के खिलाफ स्पष्ट संदेश_ 

प्रदेश संगठन का विजन अब पूरी तरह संगठन सर्वोपरि के सिद्धांत पर केंद्रित है। सूत्रों के अनुसार, संगठन राज्य में किसी भी प्रकार की समांतर सत्ता या गुट को पनपने देने के पक्ष में नहीं हैं। यही कारण है कि इमरती देवी, मुन्ना लाल गोयल, महेंद्र सिंह सिसोदिया, ओपीएस भदौरिया, गिर्राज दंडोतिया को अब तक निगम-मंडल और प्राधिकरणों में जगह नहीं मिली है। सिंधिया समर्थक सुधीर गुप्ता को ग्वालियर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया है। जबकि ग्वालियर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष उनके समर्थक अशोक शर्मा को बनाया गया है। इन दो नेताओं के अलावा सिंधिया के किसी भी समर्थक को जगह नहीं मिल सकी है।

 *दिल्ली में कई नेताओं से मिल चुके सिंधिया*

बताया जा रहा है कि अपनी पीड़ा लेकर सिंधिया ने दिल्ली में बीएल संतोष और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की है। हालांकि, भाजपा जैसे कैडर आधारित दल में इस तरह की सक्रियता को अब दबाव की राजनीति के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट में भी सिंधिया के केवल तीन विश्वसनीय मंत्रियों तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत और प्रद्युम्न सिंह तोमर की मौजूदगी यह दर्शाती है कि सरकार अब कोटा सिस्टम के बजाय परफॉर्मेंस और सामूहिक नेतृत्व पर भरोसा कर रही है।

 *अब बची हुई नियुक्तियों पर फिलहाल रोक* 

सिंधिया की नाराजगी और दिल्ली के नेताओं के पास जाकर उनके द्वारा की गई शिकायत के बाद बाकी बची नियुक्तियों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। सिंधिया बचे हुए निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में अपने समर्थकों को एडजस्ट करवाने के लिए पूरी ताकत के साथ दिल्ली में सक्रिय हैं। हालांकि यह तो वक्त बताएंगा कि वे अपने समर्थकों को एडजस्ट करवाने में कितने सफल होते हैं।