WhatsApp Image 2025 08 07 At 9.31.47 PM
Home न्यूज़ प्रादेशिक

अ.भा. साहित्य परिषद एवं जनपरिषद की बसंत काव्य गोष्ठी संपन्न

साहित्यकारों ने सरस्वती आराधना और रचना पाठ किया

811

अ.भा. साहित्य परिषद एवं जनपरिषद की बसंत काव्य गोष्ठी संपन्न

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट

मन्दसौर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद एवं जनपरिषद की संयुक्त बसंत काव्य गोष्ठी शहीद हेमू कालानी चौराहा स्थित मेडिपॉइन्ट सभागृह में शिक्षाविद पूर्व प्राचार्य महाविद्यालय डॉ बी.आर. नलवाया के मुख्य आतिथ्य, जनपरिषद प्रांतीय सहसचिव , वरिष्ठ पत्रकार डॉ. घनश्याम बटवाल की अध्यक्षता, जनभागीदारी समिति शा. लता मंगेशकर संगीत महाविद्यालय अध्यक्ष नरेन्द्र त्रिवेदी, एवं वरिष्ठ भजन गायक नरेन्द्रसिंह राणावत, दशपुर गौरव गायन गायक एवं गीतकार नंदकिशोर राठौर, डॉ. दिनेश तिवारी, समाजसेवी प्रकाश कल्याणी, राजेन्द्र तिवारी, अजय डांगी, श्रीमती चंदा डांगी, हरिश दवे, विजय अग्निहोत्री, राहुल राठौर, ईश्वर डांगी, स्वाति रिछावरा, अजीजुल्लाह खान के सानिध्य में सम्पन्न हुई।

IMG 20250204 WA0190

इस अवसर पर शिक्षाविद डॉ नलवाया ने बसंत के आगमन पर प्रकृति के प्रफुल्लित होने की बात कहते हुए नर्मदा जयंती की जानकारी प्रदान की। अपने कार्यकाल में नर्मदा नदी किनारे व्यतीत समय को क्षेत्र की आस्था और नर्मदा भैया के महत्व पर प्रकाश डाला ।

IMG 20250204 WA0191

जनपरिषद के डॉ घनश्याम बटवाल ने बसंत को ऋतुओं का राजा निरूपित करते हुए महाकवि निराला एवं सरस्वती प्राकट्टय की बात कहते हुए बसंत में प्रकृति के निखार का चित्रण किया ‘‘प्रकृति है मॉ का आंचल कभी धू कभी छॉव बन जाती, कभी पहाड़ कभी ढाल कभी आसमां बन जाती’’।

प्रकृति को बचाने से आप हम और समाज बचेगा यह दायित्व निभाना है और बसन्त की बयार लाना है

IMG 20250204 WA0189

कवि नन्दकिशोर राठौर ने बसंत पंचमी पर सरस्वती को मॉ के स्वरूप में मानकर वंदना की ‘‘हे वीणापाणि, कमलआसना, शब्द मेरे संवाद दे, करता हॅू वंदना, माँ मुझे प्यार दें’’।

हरिश दवे ने ‘‘बाग बगीचों में जब फूल खिले तो बसंत है, फूलों सी मुस्कान चेहरे पर आए तो बसंत है’’ सुनाई।

 

कवि विजय अग्निहोत्री ने ‘‘तेरे आंचल में चमके कभी चंदा, कभी तारे, तुझे पाने के लिये हम कभी जीते कभी हारे’’ सुनाया। लेखक अजय डांगी ने ‘‘सभ्यता में शिलालेख साहित्यकारों की कलम से लिखे जाते’’ कविता सुनाई। श्रीमती चंदा डांगी ने ‘‘वीणा वादिनी आई धरा पर, बसंती बयान चली धरा पर’’, श्री राजेन्द्र तिवारी ने ‘‘आय बसंत देखो फूल रही फूलवारी यहां वहां सब जगह चहक रही हरियाली’’, सुश्री दीपिका मावर ने ‘‘आ गया बसंत झूमों गाओं, बड़ा पर्व है, खुशियां मनाओ’’, डॉ. दिनेश तिवारी ने ‘‘ब्रह्मा के कमण्डल से निकला जल, मॉ भगवति प्रकट हुइ्र उस पल’’ सुनाई, प्रकाश कल्याणी ने ‘‘ने रजो, तमो एवं सतो गुणो की’’ जानकारी दी।

नरेन्द्र राणावत ने बसंत में प्रिय का विरहगीत ‘‘केसूड़ा राती कोरा पल पल सतावे रे’’ सुनाया।

श्री नरेन्द्र त्रिवेदी ने ‘‘मन दे दिया ना समझी, कैसे मन बसिया से बात कहू’’, स्वाति रिछावरा ने ‘‘आई बसंती बहार, लेके खुशिया हजार’’ गीत सुनाया। युवा कवि राहुल राठौर ने ‘‘बसंत का मौसम आया पत्ते सब हरे हो’’ कविता सुनाई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मॉ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्जवलन एवं युवा कवि ईश्वर डांगी के मधुर सरस्वति वंदना ‘‘मॉ करो कृपा, हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी’’ से हुआ।

 

इस अवसर पर शिक्षाविद पूर्व प्राचार्य डॉ नलवाया का स्वागत डॉ बटवाल , श्री अजय डांगी एवं अन्य ने किया । बसंत काव्य गोष्ठी संचालन राजेन्द्र तिवारी ने किया व आभार नंदकिशोर राठौर ने माना।

इस मौके पर साहित्य अनुरागी एवं गणमान्य उपस्थित थे ।