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जिले के अग्रणी महाविद्यालय पी एम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस में एक दिवसीय वैचारिक अनुष्ठान 

" मंदसौर मंथन 25 " सम्पन्न  विभिन्न विधाओं के विद्वान वक्ताओं ने सहभागिता कर संबोधित किया 

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जिले के अग्रणी महाविद्यालय पी एम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस में एक दिवसीय वैचारिक अनुष्ठान 

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट 

मंदसौर। जिले की अग्रणी महाविद्यालय प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के कुशाभाऊ ठाकरे प्रेक्षागृह में एक दिवसीय “मंदसौर मन्थन 25 – एक वैचारिक अनुष्ठान” शनिवार को सम्पन्न हुआ।

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इस में देश के जाने-माने शिक्षाविदों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता कर विभिन्न समसामयिक एवं महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।

मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप-दीपन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। आमंत्रित अतिथियों का उत्तरीय एवं एक पौधा देकर स्वागत किया गया।

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मन्दसौर जिले के लीड कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. ज्योति स्वरूप दुबे ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

महाविद्यालय की स्थानीय प्रबंधन समिति के पूर्व अध्यक्ष माननीय श्री नरेश चंदवानी ने कार्यक्रम के प्रारंभ की विधिवत घोषणा की।

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इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा शंख-ध्वनि की गई एवं छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की ।

मंदसौर मंथन कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज से सेवानिवृत्त ओर ख्यात शिक्षाविद प्रो. जटाशंकर ने “वेदान्ती समाजवाद” विषय पर अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में मनुष्य के जीवन की समग्र सार्थकता हेतु चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष के रूप में प्रतिपादित किए गए हैं। आज इन चारों तत्वों को समझ कर जीवन में अंगीकृत करने की परम आवश्यकता है। आपने अपने उद्बोधन में चारों पुरुषार्थों के अर्थ की व्यापकता को समझाया।

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भारतीय संस्कृति में वेदान्त दर्शन का प्रभाव शाश्वत है और कालांतर में महात्मा गांधी जयप्रकाश नारायण राम मनोहर लोहिया आचार्य नरेंद्र देव आदि ने पोषित किया

सत्र में प्रमुख वक्ता के रूप में वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव ने “ढोल गंवार शूद्र पशु नारी” विषय पर ज्ञानवर्धक उद्बोधन दिया। आपने समाज में इस पंक्ति को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियां को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रत्येक साहित्य का अर्थ उसके संदर्भ एवं प्रसंग का अध्ययन करने के बाद ही निकालना उचित होता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा अवधी लोक भाषा में रचित रामचरितमानस के अर्थों को समझने के लिए उस समय की लोक भाषा का अध्ययन अति आवश्यक है। आपने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अवधि में ताड़ना शब्द का अर्थ देखना या ध्यान रखना होता है।

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आपने तत्कालीन समय के संदर्भों को जोड़ते हुए प्रमाणित किया कि तुलसी कृत मानस में जिस चौपाई को लेकर विरोध जताया जाता है वह सही नहीं है । नारी को पूजनीय बताया गया और गंवार लोगों ने नहीं अपितु पढ़े लिखे लोगों ने बड़े बड़े घोटाले किए हैं, मानस में तो सबके हित की पुकार है ।

प्रथम सत्र के अंत में मंदसौर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट श्रीमती एकता जायसवाल ने “तनाव प्रबंधन” विषय पर अपना उद्बोधन देते हुए विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन की टिप्स देते हुए कहा कि एक सीमा के अंदर तनाव समयबद्धता, उत्तरदायित्व का अनुभव एवं बेहतर प्रदर्शन के लिए एक प्रेरक तत्व का कार्य करता है। किंतु जब इसका अतिरेक हो जाता है तो यह जीवन के हर पहलू को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में इसके प्रबंधन की आवश्यकता पड़ती है। अन्य लोगों के प्रति कृतज्ञता एवं सम्मान का भाव तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी कमियों को स्वीकार करते हुए स्वयं के व्यक्तित्व के सशक्त पहलू को निखारने के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिए।

प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता मंदसौर के पूर्व विधायक एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता श्री यशपाल सिंह सिसौदिया ने की। आपने महाविद्यालय परिवार को इस वैचारिक अनुष्ठान के सफल आयोजन हेतु बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को इस प्रकार के साहित्यिक एवं वैचारिक कार्यक्रम में सहभागिता करने का अवसर प्रदान करने के लिए मंदसौर मन्थन एक सराहनीय प्रयास है।

द्वितीय सत्र में “भारत बोध के समसामयिक अर्थ – संदर्भ” विषय पर डॉ. हरीसिंह गौड़ केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रो. अम्बिकादत्त शर्मा ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक जिजीविषा इतनी दृढ़ है कि लंबे समय तक भारत पर राज करने के बाद भी विदेशी शासक भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिटा नहीं पाए। उन्होंने कहा कि भारत बोध को आत्मसात करने के पूर्व कुछ तैयारियों के रूप में हमें पहले यह स्वीकार करना होगा कि हमारा सांस्कृतिक विस्थापन सोच समझ कर किया गया है। साथ ही यह मानना आवश्यक है कि हमारी सभ्यता एवं सांस्कृतिक ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता वर्तमान में भी बनी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा के मूल्य बोध एवं सिद्धांतों को हमें पहले तो स्वयं जीवन में अपनाना होगा, साथ ही अपनी आने वाली पीढ़ी एवं बच्चों को इसका बोध कराना होगा। भारत के अतिरिक्त कोई भी सभ्यता चराचर के साथ मानव की एकात्मता का समर्थन नहीं करती है।

प्रो. शर्मा ने कहा कि विवेक, स्मृति और कल्पना को आधार बना कर युवा वर्ग आगे बढ़ कर नेतृत्व करे ।

मंदसौर मंथन 25 में महिला एवं बाल विकास विभाग, भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री नीतीश्वर कुमार (नई दिल्ली) ने अपने वक्तव्य में कश्मीर से अनुच्छेद 370 के समाप्ति के बाद प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया। सदन में उपस्थित जनों में से कुछ गणमान्य नागरिकों ने अनुच्छेद 370 के पूर्व एवं बाद में की गई जम्मू कश्मीर की यात्राओं के अनुभव एवं अंतर बताएं।

श्री नीतीश्वर कुमार ने बताया कि जम्मू कश्मीर में कोविड-19 के दौरान दी गई बेहतर प्रशासनिक सेवाओं के फलस्वरूप लोगों का विश्वास प्रशासन के प्रति बढ़ा है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है। आपने पीपीटी के माध्यम से वहां की कला एवं दर्शन को फोटोग्राफ्स के द्वारा बताया।

कार्यक्रम में मंदसौर पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार मीना ने कहा कि अंग्रेजों ने भारत के आर्थिक शोषण के लिए पुलिस सेवा का दुरूपयोग किया। भारत की स्वतंत्रता के बाद पुलिस प्रशासन अनवरत विकसित होता रहा है एवं इसमें पारदर्शिता, विश्वास, संवेदना इत्यादि मूल्यों का विकास हुआ।

आपने कहा कि समाज में जरूरतमंदों की सहायता के लिए पुलिस द्वारा प्रशासन में जन भागीदारी बढ़ाने से सुधार हुआ है। उन्होंने आने वाले समय में साइबर अपराध एवं धोखाधड़ी के साथ ही निकट भविष्य में आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस के चलते होने वाले अपराधों पर भी चिंता जाहिर की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मंदसौर नीमच जावरा संसदीय क्षेत्र के सांसद श्री सुधीर गुप्ता ने समस्त वक्ताओं के उद्बोधनों को संकलित करते हुए कहा कि भारत को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से तोड़ने की सोची समझी रणनीति के चक्रव्यूह से निकलने के लिए हमें अपने बच्चों को भारत की ज्ञान परंपरा, रीति-रिवाजों एवं परिवार व्यवस्था से परिचित कराना आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ पत्रकार डॉ घनश्याम बटवाल एवं श्री ब्रजेश जोशी द्वारा समूह चर्चा सत्र में वक्ताओं से जिज्ञासा सहित अनेक प्रश्न किए गए एवं विद्वान वक्ताओं द्वारा समाधान परक उत्तर दिए । कार्यक्रम प्रतिवेदन डॉ. उषा अग्रवाल ने प्रस्तुत किया। प्रथम तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. वीणा सिंह एवं द्वितीय तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. सीमा जैन द्वारा किया गया।

इस अवसर पर दिन भर दो सत्रों में चले बौद्धिक अनुष्ठान में विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक, प्रबुद्धजन एवं महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अंत में सामूहिक राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।