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बाघ का खूनी हमला, तेंदूपत्ता संग्राहक को मारकर शव को बनाया निवाला,आक्रोशित ग्रामीणों ने किया चक्काजाम

25 लाख मुआवजा और नौकरी दिए जाने की मांग

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बाघ का खूनी हमला, तेंदूपत्ता संग्राहक को मारकर शव को बनाया निवाला,आक्रोशित ग्रामीणों ने किया चक्काजाम

गणेश पांडे की रिपोर्ट 

भोपाल। बालाघाट के लालबर्रा जंगल में तेंदूपत्ता तोडऩे गए एक मजदूर पर बाघ ने ऐसा खौफनाक हमला किया कि पूरा इलाका दहल उठा। बाघ ने न सिर्फ ग्रामीण की जान ली, बल्कि उसके शव को घसीटकर निवाला भी बना लिया।

घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीण सडक़ पर उतर आए और चक्काजाम कर प्रशासन को घेर लिया। मृतक की पहचान 43 वर्षीय इंद्र कुमार पिता हीरेसिंह परते के रूप में हुई है, जो मूल रूप से चमरवाही, लाटगांव, डाकघर बेहरई, तहसील व थाना बरघाट, जिला सिवनी का निवासी था और वर्तमान में यहां रहकर मजदूरी व तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य कर रहा था।

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जानकारी के अनुसार वन विकास निगम लामता प्रोजेक्ट के अंतर्गत चमरवाही बीट के कक्ष क्रमांक 418 के जंगल में मंगलवार सुबह करीब 7.30 बजे यह दर्दनाक घटना हुई। 43 वर्षीय इंद्र कुमार परते अन्य महिलाओं के साथ तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए जंगल गया था। इसी दौरान झाडिय़ों में छिपे बाघ ने अचानक हमला कर उसकी गर्दन दबोच ली। चीख-पुकार सुनकर साथ की महिलाएं दहशत में गांव भागीं और घटना की सूचना दी। इस दर्दनाक घटना ने एक परिवार की जिंदगी उजाड़ दी है। पीछे पत्नी और दो मासूम बच्चों का सहारा छिन गया।

*एक किलोमीटर तक घसीटकर ले गया शव*

सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस मौके पर पहुंची। सर्चिंग के दौरान घटनास्थल से चप्पल और तेंदूपत्ता की बोरी मिली। रेंजर विजय कुमरे के अनुसार, बाघ शव को करीब एक किलोमीटर दूर नाले तक घसीट ले गया और शरीर के निचले हिस्से को खा गया। कड़ी मशक्कत के बाद क्षत-विक्षत शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

*ग्रामीणों का फूटा गुस्सा*

घटना के बाद परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने मुख्य मार्ग पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया, जिससे लंबा जाम लग गया। ग्रामीणों की मांग थी कि 25 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने समझाइश दी। वन विभाग ने नियमानुसार 8 लाख रुपये मुआवजा घोषित किया। तात्कालिक राहत के रूप में 20 हजार रुपये मौके पर दिए गए, शेष राशि जल्द खाते में डालने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद ही ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त किया।

*लगातार हमलों से दहशत में ग्रामीण*

बताया जा रहा है कि एक महीने में यह दूसरी घटना है। इससे पहले अंतरा गांव में भी बाघ ने एक व्यक्ति को मार डाला था। लगातार हो रहे हमलों से लालबर्रा और लामता क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि पिछली घटना के बाद वन विभाग ने हाथियों की मदद से मुस्तैदी दिखाते हुए बाघ को पकडऩे के लिए एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था, लेकिन घने जंगलों और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विभाग को सफलता नहीं मिल सकी थी।

*जंगल में न जाने की चेतावनी*

वन विभाग ने इलाके में टीम तैनात कर दी है और गश्त बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को सुबह-शाम जंगल में अकेले न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। वन विभाग ने जंगल की सीमाओं पर टेंट लगाकर 24 घंटे की निगरानी और गश्त शुरू कर दी है। वन विभाग ने वर्तमान परिस्थितियों में अकेले जंगल की तरफ न जाने की अपील की है।