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अफ्रीकी चीते आने के पहले गांधीसागर अभयारण्य के वन क्षेत्र में 23 हिरण और चीतल छोड़े, जानिए वजह

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अफ्रीकी चीते आने के पहले गांधीसागर अभयारण्य के वन क्षेत्र में 23 हिरण और चीतल छोड़े, जानिए वजह

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट

मंदसौर। प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अफ्रीकी चीते छोड़े जाने के बाद मंदसौर जिले के चंबल नदी किनारे गांधीसागर अभयारण्य में नया केंद्र वन विभाग द्वारा तैयार किया गया है।

आकर्षण का केंद्र अफ्रीकी चीतों के लिए 64 वर्ग किलोमीटर विशेष बाड़ा बनकर तैयार है, कुछ शेष कार्य अंतिम चरण में है।

फॉरेस्ट ऑफिसर गांधीसागर राजेश मण्डवालिया से मिली जानकारी के मुताबिक अफ्रीकी चीते फ़रवरी अंत या मार्च में यहां लाये जा सकते हैं।

उसकी अग्रिम तैयारी के तहत चीतों के आहार की व्यवस्था जुटाई जा रही है। देश के विभिन्न स्थानों से लगभग 1400- 1500 हिरण-चीतल एवं अन्य वन्य जीव यहां लाये जाएंगे।

पहली खेप में कान्हा नेशनल पार्क से 23 हिरण और चीतल आये जो गत दिवस 90 हेक्टेयर के शाकाहारी वन्य प्राणियों के निर्धारित बाड़े में छोड़ा गया। इनकी व आने वाले वन्य जीवों की निगरानी पशु चिकित्सकों द्वारा होगी।

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फॉरेस्ट ऑफिसर ने बताया कि कान्हा नेशनल पार्क से 500 हिरण और चीतल आएंगे। वनविहार नेशनल पार्क भोपाल से 250, नरसिंहगढ़ अभयारण्य से 250 हिरण और चीतल आना है। वहीं शाजापुर क्षेत्र से 400 से अधिक कृष्ण मृग मार्च माह में यहां लाये जाना है।

उल्लेखनीय है कि अफ्रीकी चीतों की नई बसाहट के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के प्रयास हैं। कोई 17 करोड़ से अधिक लागत से लगभग 9 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में स्पेशल हाई सिक्योरिटी सिस्टम वाल बनी है। सोलर पॉवर्ड इलेक्ट्रिक फेसिंग सिस्टम होगा इसके प्रभाव से तेंदुए व अन्य बाहरी हिंसक पशु प्रवेश नहीं कर सकेंगे। अगर कोशिश करते हैं तो हल्का झटका करंट का लगेगा, नहीं मानने की स्थिति में रेड बल्ब के साथ सायरन बज उठेगा और तत्काल निगरानी दल लोकेशन पर पहुंच कार्यवाही करेगा।

वन्य जीवों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है, तीन वर्ग km क्षेत्र में ईको सेंसिटिव झोन बनाया है।

कोई साढ़े तीन सौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले गांधीसागर अभयारण्य के चयनित परिक्षेत्र में पर्यटकों के लिए फॉरेस्ट सफारी की तैयारियां भी जारी है। यहां झील महोत्सव और वाटर स्पोर्ट्स आयोजन आकर्षण का केंद्र रहे। रोमांचक इवेंट्स भी हुए हैं।

माना जा रहा है कि गांधीसागर अभयारण्य में चीतों के अलावा अन्य दुर्लभ वन्य जीवों, पशुओं, पक्षियों की उपस्थिति से देश विदेश के सैलानियों का आवागमन बढ़ेगा और क्षेत्र की आर्थिक उन्नति के साथ रोजगार भी बढ़ेगा।