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Bhagoriya Start : गंगा महादेव की पहाड़ी से गूंजी 80 किलो के मांडल की थाप, भगोरिया का आगाज!

60 से अधिक दल अपने-अपने मांदल लेकर पहुंचे, भारी जन सैलाब उमड़ा!

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Bhagoriya Start : गंगा महादेव की पहाड़ी से गूंजी 80 किलो के मांडल की थाप, भगोरिया का आगाज!

धार से छोटू शास्त्री की रिपोर्ट

Amjhera (Dhar) : गंगा महादेव की पहाड़ी शुक्रवार दोपहर 3 बजे मांदल की थाप और बासुरी की धुन से गूंज उठी।बरसों पुरानी परंपरा भगोरिया पर्व का आगाज विधिवत शिवरात्रि के पावन अवसर पर गंगा महादेव से शुरू हुआ। यहां एक दिवसीय मेले में 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओ ने दर्शन लाभ लेकर भगोरिया पर्व का उत्साह के साथ आनंद लिया।

इस पहाड़ी पर दोपहर 2 बजे से गंधवानी, सरदारपुर, धार, तिरला, मनावर विकासखंड के मांदल दलों का आना शुरू हो गया था। शाम 4 बजे तक पहाड़ी पर मांदल की थाप चारों और से गूंज उठी। गोल घेरे मे 60 से अधिक दल कतार लगाकर क्रम के अनुसार अपनी प्रस्तुति दे रहे थे। दल में युवक और युवती के साथ बच्चे भी जमकर झूम रहे थे। आकर्षक वेश भूषा में सजकर युवक आकर्षण का केंद्र थे।

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शाम 5 बजे तक नृत्य निरंतर चल रहा था। अमझेरा पुलिस ने मेले में कमान संभाल रखी थी। वही मेले में बड़ी सख्या मे जिले समेत इंदौर, रतलाम, झाबुआ, बड़वानी, उज्जैन के भी श्रद्धालु शामिल हुए। मेले में झूले , चक्री , ठंडाई, गन्ने ने रस की दुकान पर जमकर भीड़ रही। आगामी दिनों में अमझेरा, केशवी, बलेडी, जीराबाद, आमला, गोलापुरा, जलोखिया आदि गांव में भगोरिया का आयोजन होगा।

 

80 किलो वजनी मांदल

भगोरिया पर्व का उत्साह आदिवासी समाज में शिवरात्रि से देखने को मिल जाता है। प्राचीन परंपरा के अनुसार गंगा महादेव से शुरुआत के बाद इस पर्व का रंग शुरू हो जाता है। होली तक अलग अलग अंचल गांवों में भगोरिया हाट बाजार के नाम से आस पास क्षेत्र के दल मांदल लेकर पहुंचते हैं। प्रस्तुति के बाद दल का सम्मान स्थानीय ग्राम पचायत जनप्रतिनिधि करते हे। गुगीदेवी के भेरूसिंह मेड़ा ने बताया कि 80 किलो वजन से मांदल तैयार किया जाता है। इसकी तैयारी एक माह पूर्व से शुरू करते हे। 80 किलो वजन को उठाकर गोल घेरे मे 20 मिनिट तक बजाकर नृत्य दल के साथ चलते है। मेढ़ा ने बताया की पहले के मांडल तो 100 किलो वजन तक के होते थे।