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Bhatia Opened His Mouth : रिंकू भाटिया ने कई राज उगले, कई और नपेंगे!

पुलिस की पूछताछ में 'सरकारी सिंडिकेट' जैसे कई चौंकाने वाले खुलासे 

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Bhatia Opened His Mouth : रिंकू भाटिया ने कई राज उगले, कई और नपेंगे!

Dhar : इंदौर एयरपोर्ट से दिल्ली भागते हुए पकड़े गए शराब कारोबारी रिंकू भाटिया ने पुलिस की पूछताछ में कई ऐसे खुलासे किए, जो चौंकाने वाले हैं। यदि पुलिस ने कड़ियां जोड़ी तो कई नए चेहरे भी सामने आएंगे! बताते हैं कि रिंकू भाटिया ने साफ़ कहा कि वह गुजरात में अवैध शराब की स्मगलिंग कराता है और धार, झाबुआ, अलीराजपुर और इंदौर में शराब का सिंडिकेट है। इस पूरे सिंडिकेट को अफसरों और नेताओं का भी संरक्षण मिला हुआ है!

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रिंकू ने कहा कि यह शराब का सिंडिकेट वास्तव में सरकारी सिंडिकेट है। यह इंदौर में शराब की गैंगवार कराता है, यही सिंडिकेट पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र से शराब लाता है और धार, खरगोन से शराब लेकर गुजरात भेजता है। इससे उसे अरबों रुपए की कमाई होती है। इस सिंडिकेट को इंदौर के तथा धार के नेताओं का राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है।

रिंकू भाटिया ने कहा सुखराम मेरा कोई आदमी नहीं है, न में सुखराम को जानता हूं ,और न कुक्षी इलाके में पकड़ी गई शराब मेरी है। पर, सुखराम सिंडिकेट का खास आदमी है। अलीराजपुर से गुजरात में सुखराम के माध्यम से ही सिंडिकेट शराब बेचता है और धार के सिंडिकेट का मुख्य आदमी नन्हे सिंह है, जिसके लिए सुखराम काम करता हैं। रिंकू भाटिया ने यह भी कहा कि पूरे इंदौर संभाग में जितनी अवैध शराब बिक रही है, वह इसी सरकारी सिंडिकेट की है। चूंकि, सुखराम सरकारी सिंडिकेट का आदमी है इसलिए एसडीएम और तहसीलदार के साथ हुई मारपीट पर धार के सिंडिकेट और सुखराम का हाथ हो सकता है, मेरा नहीं!

रिंकू भाटिया के इस खुलासे के बाद पूरी घटना में एक नया मोड़ आ गया कि आखिर सुखराम किसका आदमी है और सुखराम ने कुक्षी के एसडीएम (IAS) पर हमला क्यों किया और तहसीलदार का अपहरण क्यों किया। क्या शराब बनाने वाले और बेचने वाले इतने पावरफुल है कि किसी सरकारी अधिकारियों को भी अपना शिकार बना लेते हैं।

इंदौर संभाग में धार ,झाबुआ ,अलीराजपुर में अवैध शराब की स्मगलिंग नहीं रुक रही है। ये सिंडिकेट पंजाब और हरियाणा से भी शराब ला रहा है। 2 नवंबर को आबकारी कमिश्नर ने इंदौर में इस संबंध में एक मीटिंग ली है। आबकारी के ट्रांसफर और पोस्टिंग के खेल में सिंडिकेट भी शामिल है। लेकिन, जिस तरह की कार्रवाई चल रही है लगता है कि भविष्य में कुक्षी जैसी घटना को रोका जा सकेगा! किंतु, सरकारी सिंडिकेट के चेहरे से परदा कैसे हटेगा, इस बात का अभी इंतजार है!