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सेवा के योग्य नहीं तो न्यायिक सेवा सदस्यों की 58 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति, 3 साल से पहले नौकरी छोड़ी तो देने होंगे 5 लाख

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भोपाल। मध्यप्रदेश में न्यायिक सेवा में आने वाले सदस्य यदि 58 साल की उम्र पूरी करने के बाद योग्य और उपयुक्त नहीं पाए जाते है तो सरकार उन्हें दो साल पहले ही अनिवार्य सेवानिवृत्त कर सकेगी। वहीं तीन साल से पहले नौकरी छोड़ने वाले न्यायिक सेवा के सदस्यों को पांच लाख रुपए जमा कराना होगा।

विधि विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गोपाल श्रीवास्तव ने इसके लिए मध्यप्रदेश न्यायिक सेवा (भर्ती तथा सेवा शर्ते) नियमों में संशोधन कर दिया है। जो संशोधन किए गए है उसमें यह बदलाव किया गया है कि न्यायिक सेवा में आने वाले प्रत्येक सदस्य जो 58 साल की आयु पुरी कर चुके है यदि 58 वर्ष के बाद सेवा में बने रहने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा योग्य और उपयुक्त पाए जाते है तो उन्हें साठ वर्ष की आयु पूरी करने पर सेवानिवृत्त किया जाएगा।

ऐसे न्यायिक सेवा के सदस्य जो योग्यऔर उपयुक्त नहीं पाए जाएंगे उन्हें 58 वर्ष की आयु पूरी होंने पर अनिवार्य रुप से सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा। इसी प्रकार लोक हित में न्यायिक सेवा के सदस्य को दस साल की सेवा पूरी करने के बाद पचास वर्ष की आयु पूरी करने पर जो भी पहले हो किसी भी समय सेवानिवृत्त किया जा सकेगा।

तीन साल से पहले नौकरी छोड़ी तो पांच लाख देना होगा-

मध्यप्रदेश में न्यायिक सेवा में आने वाले प्रत्येक सदस्य यदि नौकरी में आने के तीन साल से पहले नौकरी से त्यागपत्र देता है या सेवा छोड़ता है तो उसे पांच लाख रुपए की राशि या तीन माह के वेतन भत्ते जो भी अधिक हो का भुगतान करना होगा। इसके लिए सरकार अब न्यायाधीशों से बांड भी भरवाएगी। बांड की शर्तो को भंग करनपे की स्थिति में पांच लाख रुपए जमा कराए जाएंगे।

मुख्य न्यायाधीश सेवा के सदस्य की जांच और मूल्यांकन के लिए समिति-

मुख्य न्यायाधीश सेवा के ऐसे सदस्य की जांच तथा मूल्यांकन के लिए जो उसके पूर्व सेवा अभिलेख, गोपनीय चरित्रावली, निर्णयोें, आदेशों की गुणवत्ता तथा अन्य विषयों जैसे उसकी संनिष्ठा, प्रतिष्ठा और सेवा में उपयुक्तता पर आधारित हो एक संवीक्षा समिति का गठन किया जाएगा।