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Convict of 6 Murders Released : 6 हत्याओं के जिस दोषी को मृत्युदंड मिला, सुप्रीम कोर्ट ने बरी किया, बोला कि पुलिस ने फंसाया!

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Convict of 6 Murders Released : 6 हत्याओं के जिस दोषी को मृत्युदंड मिला, सुप्रीम कोर्ट ने बरी किया, बोला कि पुलिस ने फंसाया!

2012 में भाई-भाभी और उनके 4 बच्चों की हत्या का दोषी जेल से बाहर आया!

Agra : अछनेरा के गांव तुरकिया में भाई-भाभी और उनके चारों बच्चों की हत्या के दोषी गंभीर सिंह को सबूतों के अभाव में सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया था। अब गंभीर सिंह को यहां के सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। गंभीर सिंह ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे भगवान पर भरोसा था। वह नए सिरे से अपना जीवन शुरू करेगा, पर वह कहां जाएगा उसे खुद नहीं मालूम। उसने जेल से बाहर आने के बाद खतरा बताते हुए सुरक्षा भी मांगी।

9 मई 2012 को तुरकिया में सत्यप्रकाश, उनकी पत्नी पुष्पा और चार बच्चों की सामूहिक हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस हत्या के आरोप में सत्यप्रकाश के भाई गंभीर सिंह को जेल भेजा था। स्थानीय अदालत ने उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा था। पुलिस विवेचना में लापरवाही और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाने पर सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी को उसे बरी कर दिया था।

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उसे लेने कोई नहीं आया

बुधवार सुबह करीब 8 बजे गंभीर सिंह जेल से रिहा हुआ। रिहा होने पर गंभीर को जेल से लेने कोई रिश्तेदार नहीं आया। गंभीर सिंह खंदौली में रहने वाले अपने जीजा को कॉल किया। लेकिन, उन्होंने आने से मना कर दिया। बाहर आने के बाद कहीं जाने के लिए उसके पास 300 रुपए थे। यह पैसे उसे बैरक में रहने वाले बंदी साथियों राजवीर और विजय ने दिए।

मैं निर्दोष, मुझे फंसाया गया

गंभीर सिंह का कहना है कि पुलिस ने उसे निर्दोष फंसाया था। उसे ईश्वर पर भरोसा था कि उनके साथ अन्याय नहीं होने देगा। सेंट्रल जेल के जेलर दीपांकर भारती ने बताया कि मंगलवार देर रात बंदी गंभीर की रिहाई का परवाना आया। बुधवार सुबह उसे रिहा कर दिया गया।

गंभीर सिंह ने बताया कि भाई सत्य प्रकाश, भाभी पुष्पा और चारों बच्चों आरती, कन्हैया, मछला व गुड़िया के नाम से जिला और सेंट्रल जेल में 10-10 पौधे लगाए। वह सजा सुनाए जाने से पहले जेलों में बगिया कमान में काम करता था। सजा मिलने के बाद उससे कोई काम नहीं कराया गया। गंभीर सिंह को निचली अदालत ने वर्ष 2017 में फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसे बगिया कमान से हटा दिया गया था। उससे कोई काम नहीं लिया जा रहा था।