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Criminal Cases Against MPs : 543 में से 251 लोकसभा सांसदों पर क्रिमिनल मामले, केरल के 20 में से 19 पर केस!

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Criminal Cases Against MPs : 543 में से 251 लोकसभा सांसदों पर क्रिमिनल मामले, केरल के 20 में से 19 पर केस!

मध्य प्रदेश में 29 में से 9 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज!

New Delhi : लोकसभा के 543 सांसदों में से 251 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में दी गई। इनमें से 170 सांसदों पर दर्ज मामले गंभीर हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि केरल, तेलंगाना, ओडिशा और झारखंड राज्यों के सांसदों पर सबसे ज्यादा मामले दर्ज है । केरल के 95% सांसदों (20 में से 19) पर आपराधिक आरोप हैं। इस रिपोर्ट में न्याय प्रक्रिया को तेज करने और विशेष न्यायालयों की स्थापना की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में ‘राजनीति के अपराधीकरण’ पर एक रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में बताया गया कि 543 लोकसभा सांसदों में से 251 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 170 सांसदों पर तो ऐसे गंभीर अपराधों के आरोप हैं जिनकी सजा 5 साल या उससे ज्यादा की कैद हो सकती है। यह रिपोर्ट अलग-अलग हाई कोर्ट से मिले आंकड़ों पर आधारित है। इसे एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ के सामने पेश किया।

आपराधिक मामलों के चौंकाने वाले आंकड़े

83 पन्नों की इस रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के 20 में से 19 सांसदों (95%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 11 सांसदों पर गंभीर मामले दर्ज हैं। तेलंगाना के 17 सांसदों में से 14 (82%), ओडिशा के 21 में से 16 (76%), झारखंड के 14 में से 10 (71%), और तमिलनाडु के 39 में से 26 सांसदों (67%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी लगभग 50% सांसद आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।

हरियाणा (10 सांसद) और छत्तीसगढ़ (11 सांसद) में केवल एक-एक सांसद पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पंजाब में 13 में से 2, असम में 14 में से 3, दिल्ली में 7 में से 3, राजस्थान में 25 में से 4, गुजरात में 25 में से 5, और मध्य प्रदेश में 29 में से 9 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

विशेष पीठ का गठन करें

हंसारिया ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया था कि वे मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई की निगरानी के लिए एक विशेष पीठ का गठन करें। लेकिन कई राज्यों ने अभी तक ऐसे विशेष न्यायालय स्थापित नहीं किए हैं। इस वजह से कुछ राज्यों में ऐसे मामलों की सुनवाई दो दशक से भी ज़्यादा समय से लंबित है। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी तक, मौजूदा या पूर्व विधायकों के खिलाफ 4,732 आपराधिक मामले लंबित हैं।

सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में लंबित

उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा 1,171 मामले लंबित हैं। ओडिशा में 457, बिहार में 448, महाराष्ट्र में 442, मध्य प्रदेश में 326, केरल में 315, तेलंगाना में 313, कर्नाटक में 255, तमिलनाडु में 220, झारखंड में 133 और दिल्ली में 124 मामले लंबित हैं। इन 4,732 मामलों में से 863 मामले सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा के उल्लंघन के लिए दर्ज किए गए हैं। यह ख़ास तौर पर हिमाचल प्रदेश (307 मामले), बिहार (175), तेलंगाना (112) और महाराष्ट्र (96) में देखने को मिलता है। दिल्ली में ऐसे केवल चार मामले दर्ज हैं।

मामला सीजेआई के पास भेजा

हंसारिया ने बार-बार स्थगन, आरोपियों की गैर-हाजिरी और विशेष अदालतों को अतिरिक्त काम दिए जाने की शिकायत की। इस पर जस्टिस दत्ता और जस्टिस मनमोहन ने कहा कि चूंकि यह आदेश तीन जजों की पीठ ने दिया था, इसलिए बेहतर होगा कि इस मामले को भी तीन जजों की पीठ ही देखे। उन्होंने मामले को उचित पीठ गठित करने के लिए सीजेआई के पास भेज दिया। यह रिपोर्ट राजनीति में अपराध की गंभीरता को दर्शाती है और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की ज़रूरत पर ज़ोर देती है। यह देखना होगा कि आगे इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।