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नये वित्तीय वर्ष में विभागों को सौ प्रतिशत बजट आवंटन, 2 अप्रैल से ट्रेजरी में बिल लग सकेंगे

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नये वित्तीय वर्ष में विभागों को सौ प्रतिशत बजट आवंटन, 2 अप्रैल से ट्रेजरी में बिल लग सकेंगे

अब सालाना बजट की त्रैमासिक खर्च सीमा बदल सकेंगे विभाग, 30 अप्रैल तक मौका

भोपाल. हर साल आवंटित बजट में वित्त विभाग ने त्रैमासिक खर्च सीमा तय कर रखी है ताकि विभाग अनियंत्रित खर्च न कर सकें। लेकिन वित्तीय वर्ष 2026-27 में वित्त विभाग ने प्रशासकीय विभाग के बजट नियंत्रण अधिकारियों को मौका दिया है कि वे आईएफएमआईएस के अंतर्गत पूर्व वर्षो में योजना के क्रियान्वयन पर हुए व्वय तथा कार्य अनुभव को ध्यान में रखते हुए त्रैमासिक व्यय सीमा में संशोधन कर सकते है। वहीं वित्त विभाग ने सभी विभागों के लिए सौ प्रतिशत बजट आवंटित कर दिया है पहले यह केवल अस्सी प्रतिशत ही होता था।

आयुक्त बजट भास्कर लाक्षाकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में बजट आवंटन एवं व्यय की कार्ययोजना के संबंध में सभी विभागों के एसीएस, पीएस और सचिव तथा सभी बजट नियंत्रण अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए है। अभी तक सरकारी विभागों में वित्तीय वर्ष के पहले महीने अप्रैल में काम काज सुस्त रहता था लेकिन इस बार ट्रेजरी में एक अप्रैल को वार्षिक लेखाबंदी, क्लोजर के कामकाज के बाद दो अप्रैल से बिल लगना शुरु हो जाएंगे। याने सरकारी महकमें अप्रैल माह से ही बजट खर्च कर कामकाज शुरु कर सकेंगे।

राजस्व और पूंजीगत व्यय के बजट शीर्षो में प्रावधानित बजट का सौ प्रतिशत बजट एक अप्रैल से ही आवंटित कर दिया गया है। पहले शुरुआत में अस्सी फीसदी बजट आवंटित किया जाता था और वित्तीय वर्ष के अंतिम तिमाही में शेष बजट सौ प्रतिशत आवंटित किया जाता था।

त्रैमासिक बजट सीमा में परिवर्तन के लिए पूरे अप्रैल मौका

राजस्व एवं पूंजीगत व्यय से संबंधित योजनाओं के अंतर्गत सामान्य श्रेणी के त्रैमासिक व्यय सीमा का निर्धारण करते हुए मुक्त श्रेणी के व्यय और केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं केन्द्र क्षेत्रीय योजनाओं से संबंधित उद्देश्यों के लिए त्रैमासिक व्यय सीमा लागू नहीं होगी। इसके अलावा शेष वार्षिक आवंटन के आधार पर प्रशासकीय विभाग से संबंधित बजट नियंत्रण अधिकारी बजट की त्रैमासिक सीमा तय करेगा। व्यय सीमा निर्धारण के लिए बीसीओ पूर्व वर्षो में योजना के क्रियान्वयन पर हुए व्यय तथा कार्य अनुभव को संज्ञान में लेते हुए आईएफएमआईएस में त्रैमासिक व्यय सीमा में उपयुक्त संशोधन तीस अप्रैल तक कर सकेगा। निर्धारित अवधि में कोई संशोधन व्यय सीमा में नहीं होंने पर प्रत्येक तैमास हेतु पच्चीस प्रतिशत के मान से व्यय सीमा स्वत: उपलब्ध होगी।

इन पर खर्च की कोई लिमिट नहीं

सरकारी महकमों में वेतन भत्ते, मजदूरी, न्यायालयीन डिक्री, छात्रवृत्ति, शिष्यवृत्ति, प्राकृतिक आपदा, ऋण अदायगी के आदि अति अति आवश्यक व्ययों को मुक्त श्रेणी के व्यय में शामिल किया गया है। इन व्ययों पर त्रैमासिक व्यय सीमा लागू नहीं होगी।

अनुपूरक बजट जारी होने के पंद्रह दिन में त्रैमासिक व्यय सीमा तय होगी

अनुपूरक बजट प्रावधान जारी होंने के बाद विभाग के संबंधित बजट नियंत्रण अधिकारी द्वारा कार्य आवश्यकता के आधार पर पंद्रह दिवस में प्रचलित एवं आगामी त्रैमासों हेतु त्रैमासिक व्यय सीमा निर्धारित की जा सकेगी। बजट नियंत्रण अधिकारी द्वारा जारी अनुपूरक बजट से संबंधित त्रैमासिक व्यय सीमा का निर्धारण निर्धारित समयावधि में नहीं करने पर अनुपूरक बजट की व्यय सीमा प्रचलित त्रैमास जिसमें बजट उपलब्ध काया गया है हेतु ही उपलब्ध होगी।

यदि एक बीसीओ दूसरे बीसीओ को राशि ट्रांसफर कता है तो दूसरे बीसीओ द्वारा हस्तांतरित राशि में से किए गए व्यय को पहले बीसीओ की त्रैमासिक व्यय सीमा के अंतर्गत माना जाएगा। इस संबंध में वित्त विभाग कार्यवाही करेगा। इसके बाद किसी त्रैमास में उपलब्ध व्यय सीमा में बचत का उपयोग आगामी त्रैमास में किया जाना हो अथवा किसी आगामी त्रैमास की उपलब्ध व्यय सीमा का उपयोग पूर्व के किसी त्रैमास में करना है तो इसके लिए वित्त की अनुमति जरुरी होगी।

आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यदि विशिष्ट बजट लाईन से अन्य बजट लाईन में पुनर्विनियोजन किया जाता है तो पुनर्विनियोजन के समतुल्य व्यय सीमा स्वत: ही उस बजट लाइन में बढ़ जाएगी जिसमें पुनर्विनियोजन प्राप्त किया गया तथा जिस बजट लाइन से पुनर्विनियोजन किया गया है उसमें कम हो जाएगी।

ऐसे में बजट आवंटन रुकेगा

संचित निधि से आहरित कर बैंक खातों में रखी गई आवश्यकता से अधिक शेष राशि को राज्य की संचित निधि में जमा करने के निर्देश है। तीस अप्रैल तक इसके प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना है। इनका पालन नहीं करने पर वित्तीय वर्ष 26-27 के लिए बजट नियंत्रण अधिकारी का बजट आवंटन रोका जा सकेगा।