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Deputy Chief Minister Praised : रतलाम एसएनसीयू टीम के समर्पित प्रयास की उप-मुख्यमंत्री शुक्ल ने की सराहना!

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Deputy Chief Minister Praised : रतलाम एसएनसीयू टीम के समर्पित प्रयास की उप-मुख्यमंत्री शुक्ल ने की सराहना!

700 ग्राम वजन, अविकसित फेफड़े की समस्या से सतत देखभाल से मिली सुरक्षा!

Ratlam : उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहें हैं, ताकि हर नवजात को सुरक्षित जीवन की शुरुआत मिल सके। उन्होंने रतलाम के एसएनसीयू में नवजात की जीवन रक्षा में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ एवं पूरी टीम के समर्पित प्रयास की सराहना की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह हमारे स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती और समर्पण का प्रमाण है।

आपको बता दें कि रतलाम के कांग्सी निवासी श्रीमती हुक्की, पति देवीसिंह को प्रसव पीड़ा के बाद एमसीएच यूनिट में भर्ती किया गया था, जहां 5 फरवरी 2026 को मात्र 26 सप्ताह में समय से पहले डिलीवरी हुई। जन्म के समय बच्चे का वजन केवल 700 ग्राम था और उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही थी। नवजात को तुरंत एसएनसीयू में भर्ती कर सिविल सर्जन डॉ. एम. एस. सागर के मार्गदर्शन और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एपी सिंह के नेतृत्व में उपचार शुरू किया गया। शुरुआत में बच्चे को सीपीएपी मशीन के माध्यम से ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और बाद में नेजल प्रॉन्स से ऑक्सीजन दी जाती रही।

उपचार के दौरान बच्चे को कई बार एपनिया यानी सांस रुकने की समस्या हुई, जिसे प्रोटोकॉल के अनुसार नियंत्रित किया गया। कुछ दिनों बाद बच्चे को प्रीमैच्योरिटी के कारण एनीमिया हुआ, जिसके लिए उसे ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी देना पड़ा। धीरे-धीरे बच्चे की स्थिति में सुधार आने लगा और नली के माध्यम से मां का दूध देना शुरू किया गया, जिसकी मात्रा समय के साथ बढ़ाई गई।

इस दौरान मां हुक्की ने कंगारू मदर केयर को नियमित रूप से अपनाया, जिससे बच्चे के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और उसका वजन बढ़ने लगा। नर्सिंग स्टाफ की देखरेख में बच्चे को कटोरी-चम्मच से दूध पिलाना भी शुरू किया गया। लगभग 61 दिनों तक निरंतर उपचार, निगरानी और देखभाल के बाद आखिरकार 7 अप्रैल 2026 को नवजात को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज के समय बच्चे का वजन बढ़कर 1300 ग्राम हो चुका था। परिजनों ने पूरी चिकित्सकीय टीम का आभार व्यक्त किया!