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देशभर के DGP के सामने पेश होगा देवास पुलिस का डिजिटल इन्वेस्टिगेशन मॉडल, रायपुर कॉन्फ्रेंस में चमकेगा MP का नवाचार

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देशभर के DGP के सामने पेश होगा देवास पुलिस का डिजिटल इन्वेस्टिगेशन मॉडल, रायपुर कॉन्फ्रेंस में चमकेगा MP का नवाचार

भोपाल: देवास जिला पुलिस द्वारा लागू किया गया डिजिटल इन्वेस्टिगेशन मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर सराहना पा रहा है। रायपुर में आयोजित हो रही डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस में इस मॉडल को पूरे देश के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। देवास में इस प्रणाली को लागू कराने वाले पुलिस अधीक्षक पुनीत गहलोत ने जिला पुलिस की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। कॉन्फ्रेंस में इस नवाचार को मध्यप्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाणा प्रस्तुत करेंगे।

देवास पुलिस का यह प्रोजेक्ट पारंपरिक पुलिसिंग के उस लंबे और समय लेने वाले चरण को खत्म करता है, जिसमें पुलिसकर्मी अक्सर डाकिया की भूमिका में नजर आते थे। एफआईआर दर्ज होने के बाद एमएलसी के अलावा भोपाल भेजी जाने वाली फोरेंसिक जांच से जुड़े दस्तावेज ले जाना, फिर जांच की रिपोर्ट लेने जाना। अदालत में चालन प्रस्तुत करने से पहले विधि अधिकारी की राय प्राप्त करना और ऐसे ही कई आवश्यक दस्तावेजों को शारीरिक रूप से लेकर जाना पुलिसकर्मियों के कीमती समय को डाकिया के रूप में ही निकल जाता था। कई बार यह कार्यवाही ना सिर्फ समय ज्यादा लेती थी, बल्कि जांच की गति और गुणवत्ता दोनो पर असर डालती थी।

इस नई व्यवस्था के तहत देवास पुलिस ने सभी प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद संबंधित सभी दस्तावेज, जैसे एमएलसी रिपोर्ट, फोरेंसिक परीक्षण की रिपोर्ट, विधि अधिकारी की राय या अन्य अनुमतियां आनलाइन ही भेजी और प्राप्त की जाती हैं। इससे पुलिसकर्मियों का वह समय बचा जो वे दस्तावेज एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में लगाते थे।डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम अपडेट से जांच की पारदर्शिता भी बढ़ी है। किसी दस्तावेज में विलंब या कमी होने पर तुरंत सूचना मिल जाती है, जिससे प्रकरण की प्रक्रिया तेज होती है।

इस नवाचार का सबसे बड़ा परिणाम यह निकला कि देवास जिले ने इस वर्ष दर्ज प्रकरणों में से 85 प्रतिशत से अधिक मामलों की जांच समय पर पूरी कर ली, और अधिकांश प्रकरणों में चालान भी अदालत में समय पर पेश कर दिए गए। प्रदेश के कई जिलों में जहां फाइलों की आवाजाही और रिपोर्ट की प्रतीक्षा जांच को धीमा करती है, वहीं देवास जिले ने डिजिटल मॉडल से स्पष्ट कर दिया है कि तकनीक अपनाकर पुलिसिंग को कितनी गति दी जा सकती है।

राष्ट्रीय मंच पर इस प्रोजेक्ट की प्रस्तुति देवास पुलिस और मध्यप्रदेश पुलिस दोनों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। संभावना यह भी है कि यह मॉडल इस कॉफ्रेंस के बाद अन्य राज्यों में भी लागू करने पर विचार किया जाए। यह पहल आधुनिक, पारदर्शी और त्वरित पुलिसिंग की दिशा में मध्यप्रदेश का एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।