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मंत्रालय में घुसा ‘फर्जी आईएएस’: वल्लभ भवन की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

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मंत्रालय में घुसा ‘फर्जी आईएएस’: वल्लभ भवन की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

 

BHOPAL: राजधानी भोपाल स्थित वल्लभ भवन में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक युवक खुद को 2019 बैच का IAS अधिकारी बताकर सीधे सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंच गया। उसने अधिकारियों से कहा कि विभाग उसकी पोस्टिंग के बाद उसे भूल गया है और वह अपना तबादला कराने आया है। शुरुआती बातचीत में वह बड़े अधिकारियों के नाम लेकर खुद को सक्रिय अधिकारी बताता रहा, लेकिन गहन पूछताछ में पूरा मामला संदिग्ध निकल आया।

● कैसे हुआ खुलासा

सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया के अनुसार योगेंद्र सिंह चौहान नाम के युवक ने खुद को 2019 बैच का आईएएस अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि वह एक्टिव अफसर है और विभाग ने उसकी पदस्थापना के बाद उसे नजरअंदाज कर दिया है। उसने इंदौर के पूर्व कलेक्टरों के साथ काम करने की बात कही और वरिष्ठ अधिकारियों से बात कराने की भी पेशकश की।

जब उससे बैच, कैडर, प्रशिक्षण और वर्तमान पदस्थापना से जुड़े तकनीकी सवाल पूछे गए तो उसके जवाब उलझे हुए और असंगत पाए गए। अधिकारियों को शक हुआ तो तत्काल मंत्रालय की सुरक्षा शाखा को सूचना दी गई।

● सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह व्यक्ति मंत्रालय परिसर और विभागीय दफ्तर तक कैसे पहुंच गया। प्रवेश पास और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया के बावजूद उसका अंदर तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था में संभावित ढिलाई की ओर संकेत करता है। मामले के बाद मंत्रालय स्तर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की चर्चा तेज हो गई है।

पूछताछ में क्या सामने आया

सुरक्षा अधिकारियों ने जब विस्तृत पूछताछ की तो युवक कोई वैध दस्तावेज या नियुक्ति पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। उसकी बातों में लगातार विरोधाभास सामने आया। इसके बाद उसके परिजनों को बुलाया गया। परिवार ने बताया कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और लंबे समय से उसका इलाज चल रहा है।

● कार्रवाई क्यों नहीं हुई

परिजनों के अनुसार युवक की मानसिक दशा अस्थिर है। प्रारंभिक स्तर पर इसे आपराधिक मंशा के बजाय मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा मामला मानते हुए उसे परिवार के हवाले कर दिया गया। फिलहाल उसके विरुद्ध कोई औपचारिक कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।

● बड़ा संदेश

यह घटना प्रशासनिक सतर्कता का उदाहरण भी है और सुरक्षा चूक का संकेत भी। एक ओर अधिकारियों की सतर्कता से फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, वहीं दूसरी ओर यह प्रश्न भी खड़ा हो गया कि संवेदनशील मंत्रालय परिसर में पहचान की जांच कितनी प्रभावी है। आने वाले दिनों में इस घटना के बाद सुरक्षा मानकों को और सख्त किए जाने की संभावना है।