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Fake Note Gang : नकली नोट छापने वाला गिरोह पकड़ाया, फ़िल्म ‘फर्जी’ देखकर मिला आइडिया!

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Fake Note Gang : नकली नोट छापने वाला गिरोह पकड़ाया, फ़िल्म ‘फर्जी’ देखकर मिला आइडिया!

इंदौर के होटल में चल रहा था सारा कामकाज, मास्टर चाबी ने खोला राज!

Indore : यहां के एक होटल के कमरे में कुछ पढ़े-लिखे बेरोजगार युवकों द्वारा नकली नोटों की फैक्ट्री चलाई जा रही थी। यह मामला तब उजागर हुआ, जब होटल के स्टाफ को संदेह हुआ और उसने मास्टर चाबी से रूम खोला। नज़ारा देखने लायक था, कमरे में प्रिंटर, लेमिनेटर, कंप्यूटर और लाखों के नकली नोट बिखरे पड़े थे। डीसीपी क्राइम ब्रांच ने जानकारी दी कि आरोपी डेढ़ महीने से होटल में रुके थे। यहां पर उन्होंने दो कमरे ले रखे। यहीं पर ही वे नकली नोट बनाने का काम कर रहे थे।

सूचना मिलने पर क्राइम ब्रांच ने छापेमारी कर पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया, जिसमें छिंदवाड़ा का अब्दुल शोएब उर्फ छोटू (25), जो आर्ट एंड डिज़ाइन से ग्रेजुएट है, शामिल था। शोएब लंबे समय से बेरोजगार था और अपने पिता पर चढ़े कर्ज के कारण तनाव में था। उसने ऑनलाइन फर्जी करेंसी से जुड़े ग्रुपों को खंगालना शुरू किया, जहां उसकी पहचान द्वारका (गुजरात) के मयूर चम्पा (25) से हुई, जिसने फिल्म ‘फर्जी’ देखने के बाद नकली नोट छापने का आइडिया सोचा।

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नकली नोट छापने के मामले में क्राइम ब्रांच ने गुजरात के द्वारका से मयूर चम्पा (25) को गिरफ्तार किया। मयूर ने ही शाहिद कपूर ‘फर्जी’ मूवी देखकर नकली नोट छापने का आइडिया आया। उसने फेसबुक पर अन्य आरोपियों से संपर्क किया। इसके बाद नकली नोट छापने की शुरुआत हुई। मयूर ने बी.कॉम की पढ़ाई की है और टूरिस्ट को होटल दिलाने संबंधित एजेंट का काम करता है। अभी उसके पास से लैपटॉप जब्त होना बाकी है।

पुलिस पूछताछ में आरोपी शोएब ने बताया कि उसने बेरोजगार साथियों जैसे रईस खान और प्रफुल्ल कोरी को भी शामिल किया। इसके बाद भोपाल के आकाश घारु और मेडिकल स्टोर संचालक शंकर चौरसिया भी इस रैकेट में शामिल हुए। सारा नेटवर्क फेसबुक के माध्यम से बना था। सभी ने हाई क्वालिटी प्रिंटर, सॉफ्टवेयर, लेमिनेशन मशीन और अन्य उपकरण खरीदकर नकली नोट छापने की प्रक्रिया शुरू की। हालांकि, होटल के एक कर्मचारी की चौकसी ने उन्हें पकड़वाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

पुलिस ने सारी जानकारी दी

डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पिछले दिनों होटल इटरनिटी के 301 नंबर कमरे से नकली नोट छापने की सूचना पर दबिश देकर यहां से 3 भोपाल से 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उसी ने पूछताछ में बताया था कि उनका एक साथी शाम को ही द्वारका गया है। इस पर टीम भी उसके पीछे पहुंची और द्वारका से मयूर चम्पा को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि वह गैंग का महत्वपूर्ण सदस्य है। वह आर्थिक तंगी से परेशान था। कुछ महीने पहले ही उसकी शादी हुई है। मयूर ने ‘फर्जी’ फिल्म देखी थी। इसके बाद उसे नकली नोट छापने का आइडिया आया।

घेराबंदी की और पांच आरोपी गिरफ्तार

क्राइम ब्रांच की टीम को 13 अप्रैल को होटल इटरनिटी में नकली नोट छापने की सूचना मिली थी। टीम ने यहां घेराबंदी की और इस पूरे मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से 500 के 870 नकली नोट (4 लाख 35 हजार), बटर पेपर, प्रिंटर, लकड़ी की फ्रेम, कटिंग मशीन, लेमिनेशन बंडल, सील, लैपटॉप, मोबाइल, लेमिनेटर, एटीएम कार्ड सहित अन्य सामान जब्त किया गया। अब क्राइम ब्रांच की टीम छठे आरोपी मयूर का लैपटॉप जब्त करेगी। उसका पुलिस रिमांड लेकर पूछताछ की जाएगी।

डीसीपी क्राइम ब्रांच ने बताया कि कुछ आरोपी इंदौर के होटल में आकर रुके थे। यहां पर मयूर भी यही काम सीखने आया था। मयूर ने ही नोट छापने के सॉफ्टवेयर की व्यवस्था की थी। जिससे सेम साइज के नोट छापे जा सकते थे। खास बात यह थी कि इस सॉफ्टवेयर से असली नोट की तरफ नकली नोट में भी वाटरमार्क बन जाते थे। वह अपनी मर्जी के अनुसार नोटों पर नंबर भी डाल सकते थे। इस सॉफ्टवेयर के बारे में भी जानकारी निकाली जा रही है। टीम ये जानकारी निकाल रही है कि अब तक आरोपियों ने कितना पेपर इस्तेमाल किया और उससे कितने नोट बनाए हैं। इसके साथ ही इन्होंने भोपाल के अलावा नकली नोट कहां-कहां चलाए हैं उसकी भी जानकारी निकाली जा रही है।