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Freed Government Land from Land Mafia : प्रशासन ने रंगवासा की ₹300 करोड़ की सरकारी जमीन को भू माफियाओं के कब्जे से छुड़ाया, 3 खसरे निरस्त!

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Freed Government Land from Land Mafia : प्रशासन ने रंगवासा की ₹300 करोड़ की सरकारी जमीन को भू माफियाओं के कब्जे से छुड़ाया, 3 खसरे निरस्त!

इस सरकारी जमीन पर काटी जा रही अवैध कॉलोनी पर अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई!

Indore : कलेक्टर आशीष सिंह भू माफियाओं के कब्जे से लगातार शासकीय जमीन मुक्त करवा रहे है। हाल ही में ऐसी दो कार्रवाई के बाद अब कलेक्टर ने इस पहल को आगे बढ़ाते हुए राऊ तहसील की 300 करोड़ की बेशकीमती जमीन को भू माफियाओं से बचाया। नायब तहसीलदार अशोक परमार ने कलेक्टर के निर्देश पर इस शासकीय भूमि को भूमाफियाओं से बचाने की कार्रवाई की। लेकिन, इस जमीन पर बनाई जा रही अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई नहीं हुई।
इसकी शुरुआत यह हुई कि इस बेशकीमती जमीन का नामांतरण आवेदन शासन हित में निरस्त करने की कार्रवाई की गई। यह भूमि पूर्व में शासन द्वारा निर्धन पट्टाधारियों को जीवन यापन के लिए आवंटित की गई थी, जिसे भूमाफिया ने हड़पने का प्रयास किया। भू माफियाओं द्वारा इस जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण के लिए आवेदन लगाया गया था।

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नायब तहसीलदार परमार ने मामले की जांच कर पाया कि जमीन शासकीय है और इसका हस्तांतरण अवैध है। नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्होंने न सिर्फ नामांतरण आवेदन निरस्त किया, बल्कि शासन की बेशकीमती भूमि को संरक्षित भी किया। यह कार्रवाई कलेक्टर आशीष सिंह द्वारा चलाए जा रहे भूमाफिया विरोधी अभियान की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

अवैध कॉलोनी का प्रतिवेदन बनाकर भेजा

अतिरिक्त तहसीलदार (राऊ) अशोक परमार ने बताया कि भू माफिया ने शासकीय भूमि के नामांतरण के लिए आवेदन लगाया था। जिसकी जांच के बाद हमने नामांतरण का आवेदन निरस्त कर दिया। मौके का निरीक्षण करने पर पाया गया कि यहां करीब दो साल से अवैध कॉलोनी का विकास कार्य चल रहा था। जिसका प्रतिवेदन बनाकर कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारी को भेज दिया है।

अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई का इंतजार

इस कार्रवाई से बौखलाए भूमाफिया अब राजनीतिक पहुंच के जरिए एसडीएम राऊ पर अपील के लिए दबाव बना रहे हैं। जमीन पर कॉलोनी काट दी गई। बाउंड्री वॉल, पौधे और तालाब को पाटने जैसी अवैध गतिविधियाँ भी की गई। साथ ही पहाड़ को काटकर अवैध खनन भी हुआ। लेकिन, अब तक न तो किसी तरह की कानूनी कार्रवाई हुई है और न कॉलोनी को अवैध घोषित किया गया। अब निगाहें कलेक्टर आशीष सिंह पर हैं कि वे इस कॉलोनी को कब अवैध घोषित कर सख्त कदम उठाते हैं।

पट्टे की 75 बीघा जमीन पर अवैध कॉलोनी

ग्राम रंगवासा की शासकीय भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कॉलोनी बसाई जा रही थी। चौंकाने वाली बात यह है कि यह भूमि संभाग आयुक्त दीपक सिंह के आदेश से शासकीय घोषित की जा चुकी थी। इसके बावजूद इस पर खुलेआम कब्जा, प्लॉटिंग और बिक्री की जा रही थी। जानकारी के मुताबिक, यह भूमि सर्वे नंबर 1/2/7, 4/12, 4/16, 4/31, 4/35, 4/49 सहित अन्य सर्वे नंबरों में दर्ज है। यह वर्ष 1925 से लेकर 1979 तक शासकीय भूमि के रूप में रिकार्ड में रही। वर्ष 1974-75 के दौरान कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से खसरा कॉलम नंबर 12 में फर्जी कब्जा दर्ज कर ‘श्री गणेश सामूहिक कृषि संस्था’ के नाम पर जमीन दर्ज कर दी गई थी।

वर्ष 2003 में एक और गंभीर अनियमितता हुई, जब तत्कालीन तहसीलदार ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर उक्त भूमि का फर्जी बंटवारा कर उसे व्यक्तिगत खातों में दर्ज करवा दिया था। यह बंटवारा अब तक निरस्त नहीं हुआ। जबकि, संभाग आयुक्त ने अपने आदेश में इसका भी उल्लेख किया है। इस आधार पर भू-माफियाओं ने करीब 300 करोड़ रुपए की भूमि को अवैध रूप से बेच दिया। बताया जा रहा है कि भूमाफिया ने डायरी पर प्लॉट काटकर बेच दिए है।

यह भू-राजस्व संहिता की धारा 165 (7 ख) एवं रजिस्ट्रीकरण एक्ट के उपबंधों के उल्लंघन में संस्था के 18 सदस्यों के नाम से बंटवारा (बटांकन, नक्शा सहित) स्वीकृत नामांतरित कर गंभीर त्रुटि की है। संस्था पंजीकृत रही थी, ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। संस्था किस उद्देश्य से पंजीकृत हुई थी, यह भी स्पष्ट नहीं था। संस्था के बायलॉज भी प्रस्तुत नहीं किए गए थे।

ईओडब्ल्यू को भी शिकायत हुई

इस संबंध में ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) व कलेक्टर को एडवोकेट जितेंद्र पटेल ने एक साल पहले व अभी एक बार फिर शिकायत की गई। शिकायत में बताया गया कि उक्त सरकारी पट्टे की भूमि पर अवैध कॉलोनी काटकर शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया। लेकिन, अभी तक इस मामले में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने नामांतरण प्रकरण क्रमांक 3093/अ-6/2024-25 और 3094/अ-6/2024-25 पर आपत्तियां दर्ज की और मांग की है कि इस भूमि को पुनः शासकीय घोषित किया जाए,फर्जी बंटवारा निरस्त हो और दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाए।