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सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योगों के लिए निजी भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र बनाने सरकार देगी 5 करोड़ रुपए

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Finance Department Issued Orders

सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योगों के लिए निजी भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र बनाने सरकार देगी 5 करोड़ रुपए

भोपाल: मध्य प्रदेश में अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए निजी भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए राज्य सरकार डेढ़ करोड़ से 5 करोड रुपए तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी।

सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम विभाग में इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।
अब सरकारी संसाधनों के अलावा राज्य सरकार औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने के लिए निजी निवेशकों की भी मदद लेगी। इसीलिए निजी भूमि पर सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योगों के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने सरकार औद्योगिक क्षेत्र को तैयार करने पर होने वाले खर्च का 50 प्रतिशत राशि डेवलपर एजेंसी को वित्तीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराएगी

इस तरह मिलेगी वित्तीय सहायता

प्रदेश में सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योगों के लिए 20 एकड़ तक के क्षेत्रफल में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने पर आने वाले कुल खर्च का 50 प्रतिशत या एक करोड़ 50 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग डेवलपर एजेंसी को उपलब्ध कराएगा। 20 एकड़ से 50 एकड़ तक औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए प्रस्तावित व्यय का 50 प्रतिशत अधिकतम 3 करोड़ तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

50 एकड़ से अधिक के क्षेत्रफल में औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण हेतु आने वाले खर्च का 50 प्रतिशत अधिकतम 5 करोड रुपए तक वित्तीय सहायता राज्य शासन द्वारा इस औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण के लिए चयनित एजेंसी को उपलब्ध कराई जाएगी।

औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण करने वाली एजेंसी को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए योजना राज्य साधिकार समिति से अनुमोदित कराई जाएगी। यह नियम सरकार ने तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए हैं।
यह होगा फायदा

मध्य प्रदेश में अभी तक राज्य सरकार स्वयं के संसाधनों से इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करती है। औद्योगिक क्षेत्र में सड़क, सीवरेज जलप्रदाय की लाइने, बिजली, स्ट्रीट लाइट और अन्य सुविधाएं विकसित कर निवेशकों को उपलब्ध कराती है। अब औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने पर आने वाला खर्च निजी निवेश स्वयं वहन करेंगे और सरकार को औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने पर कोई राशि खर्च नहीं करना होगा। जिससे सरकारी खजाने पर आने वाला भार कम होगा और निजी एजेंसी भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए आगे आएंगी ।