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ईरान ने बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें ये क्या है? भारत समेत दुनिया पर क्या होगा असर

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ईरान ने बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें ये क्या है? भारत समेत दुनिया पर क्या होगा असर

अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री पट्टी ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ को बंद करने का फैसला किया है. खबरों के मुताबिक ईरान ने इस सामरिक रास्ते की नाकाबंदी शुरू कर दी है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर रुकने की चेतावनी दी जा रही है.

फारस की खाड़ी और हिंद महासागर को जोड़ने वाला यह रास्ता महज 50 किलोमीटर चौड़ा है, जिस वजह से ईरान के लिए इसे रोकना बहुत आसान है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में तनाव को देखते हुए अमेरिका ने भी अपने व्यापारिक जहाजों को खाड़ी के इस इलाके से दूर रहने की सलाह दी है.इजरायल- अमेरिका के संयुक्त हमले के बीच ईरान ने बड़ा फैसला लेते हुए दुनिया का सबसे चर्चित होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया है. इस रास्ते के बंद होने से दुनिया में तेल की सप्लाई में कमी और कीमत बढ़ सकती है.

इजरायल-अमेरिका के संयुक्त हमले ने मिडिल ईस्ट में हड़कंप मचा दिया है. इन्हीं तनावपूर्ण हालात में एक बार फिर मिडिल ईस्ट का एक रास्ता होर्मुज स्ट्रेट चर्चा में आ गया है. यह एक पतले पानी का रास्ता (कच्चे तेल) है. होर्मुज स्ट्रेट को एक पतला समुद्री गलियारा माना जाता है. यह फारस की खाड़ी का मेन एंट्री गेट है. यह उत्तर में ईरान और दक्षिण में यूनाइटेड अरब अमीरात, ओमान के बीच है. यह एक तरह से फारस की खाड़ी और हिंद महासागर का लिंक है.

यह होर्मुज स्ट्रेट लगभग 100 मील है यानी 161km लंबा है. यह रास्ता लगभग 21 मील पतला हो जाता है. यहां पर जो नेविगेशन लेन है, वो सिर्फ दो मील तक ही चौड़ी है. इसके उथले पानी की वजह से जहाजों पर नेवल माइंस का खतरा रहता है. यहां जहाजों के किनारे से लॉन्च की जाने वाली मिसाइलों, पेट्रोल क्राफ्ट और हेलीकॉप्टर से खतरा बना रहता है. जीवनरेखा माना जाता है. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक, हर दिन इस रास्ते से लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो पूरी दुनिया की कुल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है. इसके अलावा दुनिया की 20 प्रतिशत लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई भी इसी मार्ग से होती है.

इस रास्ते को अगर ईरान बंद करता है, तो तेल की कीमतों में इजाफा हो सकता है. तेल सप्लाई में रुकावट होगी. क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोत्तरी होगी. यह दुनिया की इकोनॉमी को अस्थिर कर सकती है. यानी कुल मिलाकर इस रास्ते के बंद होने से ग्लोबल तेल मार्केट पर बड़ा असर पड़ेगा.ईरान ने हॉर्मुज को बंद कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की है.

जानकारों का कहना है कि अगर सऊदी अरब और यूएई जैसे देश दूसरे रास्तों से तेल भेजने की कोशिश भी करें, तो उनकी क्षमता बहुत सीमित है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह नाकाबंदी कब तक चलती है और वैश्विक बाजार इस झटके को कैसे झेलता है.