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Judge’s Name Written in Place of Accused : पुलिस ने गैर जमानती वारंट पर आरोपी की जगह जज का नाम लिख दिया!

पुलिस उसी जज की तलाश में लग गई जिन्होंने कानूनी नोटिस जारी किया!

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Judge’s Name Written in Place of Accused : पुलिस ने गैर जमानती वारंट पर आरोपी की जगह जज का नाम लिख दिया!

मीडियावाला के स्टेट हेड विक्रम सेन की रिपोर्ट

Firozabad (UP) : फिरोजाबाद के पुलिस उप निरीक्षक की एक अजीबो-गरीब गलती सामने आई, जो खासी चर्चा में है। उन्होंने जज को ही चोरी के मामले में आरोपी बना दिया। इस मामले में पुलिस उपनिरीक्षक को लापरवाही के लिए जवाबदेह ठहराते हुए निलंबित करने के साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए।
जानकारी के अनुसार उपनिरीक्षक ने गैर-जमानती वारंट पर रिटर्न दाखिल करते समय गलती से आरोपी के बजाए जज का नाम दर्ज कर दिया। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सौरभ ने कार्रवाई करते हुए थाना (उत्तर) में तैनात उपनिरीक्षक बनवारी लाल को निलंबित करने के आदेश दिए। उसके खिलाफ विभागीय जांच के लिए क्षेत्राधिकारी अनूप कुमार चौरसिया को जिम्मेदारी सौंपी गई।

आरोपी की जगह लिखा जज का नाम
यह घटना पिछले सप्ताह फिरोजाबाद जिले के थाना (उत्तर) में हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने करीब 24 साल पुराने चोरी के मामले में आरोपी को कोर्ट में पेश करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया था। अपर सिविल जज सिविल (सीनियर डिवीजन) नगमा खान की कोर्ट के एक वाद में थाना (उत्तर) के कोटला रोड पीके मांटेसरी स्कूल के पास रहने वाले अभियुक्त राज कुमार उर्फ पप्पू मुलजिम है।
उसके खिलाफ चोरी और माल बरामदगी का केस है। सुनवाई के दौरान अभियुक्त कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ। कई बार गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए गए। अभियुक्त के हाजिर न होने पर अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन नगमा खान ने पुलिस को अभियुक्त के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई के आदेश दिए। इस आदेश की कॉपी तामील कराने की जिम्मेदारी कोतवाली (उत्तर) के उप निरीक्षक बनवारी लाल को सौंपी गई थी। दारोगा बनवारी लाल ने 23 मार्च को सुनवाई के दौरान जब फाइल रिव्यू के लिए कोर्ट में जो आख्या पेश की उसे देखकर जज नगमा खान भी हैरान रह गईं।


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जानकारी अनुसार पुलिस उपनिरीक्षक ने अदालत से कहा कि जब मैंने संलग्न गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) की तामील की, तो नगमा खान के दिए गए पते पर गहन तलाशी ली गई। हालांकि, उस नाम का कोई भी आरोपी वहां नहीं मिला। इसलिए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया आगे के आदेश दें। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने पुलिस उपनिरीक्षक की खिंचाई की और 24 मार्च को दिए गए आदेश में मजिस्ट्रेट ने कहा कि यह अजीब है कि पुलिस को इस बात का ‘बहुत कम या बिल्कुल भी पता नहीं था’ कि अदालत ने क्या भेजा था, किसने भेजा था और किसके खिलाफ भेजा था।

मजिस्ट्रेट नगमा खान ने कहा कि प्रक्रिया पर जरा भी ध्यान दिए बिना, उन्होंने लापरवाही से उद्घोषणा को गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के रूप में संदर्भित किया और बिना सोचे-समझे पीठासीन अधिकारी का नाम लिख दिया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पुलिस प्रमुख ने कहा कि उन्होंने एसआई को पुलिस लाइन भेजने का आदेश दिया और इस गंभीर गलती का कारण जानने के लिए घटना की जांच के निर्देश दिए।

न्यायालय ने भी ने कार्रवाई का निर्देश दिया
अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि कार्रवाई की प्रक्रिया में शामिल पुलिस अधिकारी को उच्चतम स्तर की सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि, इन प्रक्रियाओं के गंभीर परिणाम होते हैं। अगर ऐसे लापरवाह पुलिस अधिकारियों को इस तरह से अंधाधुंध तरीके से प्रक्रिया पूरी करने की छूट दी जाती है, तो वे बेकाबू हो जाएंगे और अपनी मर्जी से किसी की भी स्वतंत्रता के बहुमूल्य मौलिक अधिकारों को कुचल देंगे। इसे कर्तव्य की घोर उपेक्षा बताते हुए अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जांच शुरू करने और इंस्पेक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।