WhatsApp Image 2025 08 07 At 9.31.47 PM
Home पॉलिटिक्स

बंगाल में कैलाश विजयवर्गीय ने रखी थी जीत की नींव, संगठनात्मक स्तर पर मध्य प्रदेश भाजपा के मॉडल ने दिखाया कमाल

283

बंगाल में कैलाश विजयवर्गीय ने रखी थी जीत की नींव, संगठनात्मक स्तर पर मध्य प्रदेश भाजपा के मॉडल ने दिखाया कमाल

भोपाल: पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के पीछे मध्य प्रदेश के एक नेता द्वारा वर्षो पहले खड़ी की गई संगठनात्मक मजबूती इस चुनाव में साफ नजर आई। इस मजबूती की नींव रखने का श्रेय भाजपा के जिन नेताओं को दिया जा रहा है उनमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी शामिल हैं। जिन्होंने राष्ट्रीय महामंत्री रहते हुए बंगाल में संगठन को जमीनी स्तर पर खड़ा किया था, जिसका परिणाम 4 मई को देखने को मिला।

जब विजयवर्गीय को बंगाल का प्रभारी बनाया गया था, उस समय राज्य में भाजपा की स्थिति बेहद कमजोर थी। उस वक्त पार्टी की मौजूदगी नगण्य मानी जाती थी। उन्होंने लगातार दौरे, कार्यकर्ता संपर्क और आक्रामक तेवर, संगठन विस्तार के जरिए पार्टी को मजबूती दी। इस दौरान उन्हें हिंसक विरोध और पुलिस कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा। उनके खिलाफ कई राजनीतिक मामले भी दर्ज हुए थे।

Bjp In Bengal

*भाजपा की बढ़त का टर्निंग पॉइंट* 

विजयवर्गीय के बंगाल के प्रभारी कार्यकाल के दौरान ही भाजपा ने वहां पर बड़ा उछाल दर्ज किया था। वहां पर विधानसभा सीटों की संख्या जहां 2016 में 3 थी जो बढ़कर 2021 में 77 तक पहुंच गई थी। इसे बंगाल की राजनीति में भाजपा के उभार का टर्निंग पॉइंट माना जाता है। बताया जाता है कि संगठनात्मक स्तर पर विजयवर्गीय ने मध्य प्रदेश मॉडल को बंगाल में लागू किया। उस दौरान उन्होंने पन्ना प्रभारी जैसी व्यवस्था शुरू की , जिससे पार्टी पिछले चुनाव में हर मतदाता तक पहुंच बनाने में सफल रही। यह व्यवस्था इस चुनाव तक जारी रही। इस बार पार्टी ने इसे और विस्तार देते हुए गली प्रमुख तक नियुक्त किए, जिससे बूथ से भी नीचे के स्तर तक नेटवर्क मजबूत किया गया।

oclro5cs kailash

*भावुक हो गए विजयवर्गीय* 

हालांकि इस बार के चुनाव में पार्टी ने विजयवर्गीय को बंगाल नहीं भेजा। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों को देखते हुए संगठन ने यह फैसला लिया। इसके बावजूद उनकी बनाई संगठनात्मक संरचना का असर चुनाव में दिखाई दिया। चुनाव परिणाम सामने आते ही बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत को देखकर विजयवर्गीय भावुक हो गए। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत और बलिदान का परिणाम बताया।

*सीमित नेताओं को ही भेजा था बंगाल* 

इस बार मध्य प्रदेश से सीमित संख्या में नेताओं को चुनाव प्रचार के लिए बंगाल भेजा गया था। जिन्हें भेजा गया था उन्हें भी सीमावर्ती क्षेत्रों में जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने भी बखूबी काम किया, ऐसे नेता करीब बीस दिन तक यहां पर रहे, उस दौरान उन्होंने भी बंगाल की जमीन पर काम कर प्रदेश की सहभागिता जीत में दर्ज करवाई।