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Lawyer Sentenced for Fake Cases : विरोधियों को फंसाने के लिए दलित महिला के जरिए फर्जी केस बनाने वाले वकील को उम्र कैद!

विशेष न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए वकील को साजिश और कानून के दुरुपयोग का दोषी ठहराया!

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Lawyer Sentenced for Fake Cases : विरोधियों को फंसाने के लिए दलित महिला के जरिए फर्जी केस बनाने वाले वकील को उम्र कैद!

Lucknow : यहां की एक विशेष अदालत ने एक वकील को दलित महिला की पहचान का दुरुपयोग कर अपने विरोधियों के खिलाफ दर्जनों फर्जी मामले दर्ज कराने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उंस वकील पर 5.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम) विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए परमानंद गुप्ता को अपने प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के लिए दलित महिला पूजा रावत के माध्यम से झूठे मामले दर्ज करके षड्यंत्र रचने और कानून का दुरुपयोग करने का दोषी ठहराया।

विशेष लोक अभियोजक अरविंद मिश्रा ने बताया कि गुप्ता ने रावत के साथ मिलीभगत करके अपने नाम से कम से कम 18 और रावत के ज़रिए 11 मामले दर्ज कराए थे। इनमें से कई मामले उनके प्रतिद्वंद्वी अरविंद यादव और उनके परिवार के ख़िलाफ़ संपत्ति विवाद से जुड़े थे। उन्होंने बताया कि इन झूठे मामलों में बलात्कार और छेड़छाड़ के आरोप भी शामिल थे।

मामला तब प्रकाश में आया जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दलीलें रखी गईं। इसके बाद संबंधित थानों से रिपोर्ट मांगी गई। 5 मार्च, 2025 को उच्च न्यायालय ने मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दिए। जाँच से पता चला कि गुप्ता ने यादव और उनके परिवार को झूठे आरोप में फँसाने के लिए रावत की दलित पहचान का इस्तेमाल करने की साज़िश रची थी।

जाँच के दौरान यह बात भी सामने आई कि कथित घटनाओं के समय रावत विवादित स्थल पर मौजूद ही नहीं थीं। जिस मकान के बारे में उन्होंने दावा किया था कि वह किराए पर है, वह असल में यादव परिवार द्वारा निर्माणाधीन था। रावत ने बाद में 4 अगस्त, 2025 को अदालत में एक आवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया कि उसे गुप्ता और उसकी पत्नी संगीता ने फंसाया था, जो एक ब्यूटी पार्लर चलाती है, जहां वह सहायक के रूप में काम करती थी।

रावत ने स्वीकार किया कि उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने यौन उत्पीड़न का झूठा बयान देने के लिए मजबूर किया गया था और उन्होंने क्षमादान की गुहार लगाई। अदालत ने उन्हें सशर्त क्षमादान दे दिया। हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि गुप्ता को पूरी जानकारी थी कि आरोपों में आजीवन कारावास की संभावना है, इसलिए उसने षड्यंत्र रचा था और इसलिए वह कठोर सजा का हकदार है।

आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उसके फैसले की एक प्रति उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजी जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वकील परमानंद गुप्ता जैसे अपराधी अदालत परिसर में प्रवेश न कर सकें और कानून का अभ्यास न कर सकें, ताकि न्यायपालिका की पवित्रता बनी रहे।