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Lecture Series : जहीर कुरेशी स्मृति व्याख्यानमाला में रूमी जाफरी ने कहा ‘मैं रायटर बन गया, लेखक न बन सका!’

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Lecture Series : जहीर कुरेशी स्मृति व्याख्यानमाला में रूमी जाफरी ने कहा ‘मैं रायटर बन गया, लेखक न बन सका!’

सीमा कपूर ने कहा ‘गरीबी या तो अपराध की गली में धकेल देती है या हिम्मत देती!’

Mumbai : शहर और परिवार के संस्कार ही हमें लेखक बनाते हैं।मेरा खानदान शायरों का खानदान है। मैं उस भोपाल में पैदा हुआ जिसका पानी पीकर जावेद अख्तर, दुष्यंत कुमार, शरद जोशी (दोनों के परिजन सभागार में मौजूद थे) बड़े लेखक बने। मैं रायटर तो बन गया पर लेखक न बन सका। यह विचार प्रख्यात कथा, पटकथा और संवाद लेखक रूमी जाफरी ने ‘कथा’ व ‘दीनदयाल मुरारका फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘जहीर कुरेशी स्मृति व्याख्यानमाला 4’ में व्यक्त किए। यह व्यख्यान ‘हिंदी-उर्दू गजल आज’ विषय पर आयोजित था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं निर्माता, निर्देशक, लेखिका सीमा कपूर ने कहा कि भूख और गरीबी ही हमें साहस देती है। गरीबी या तो अपराध की गली में धकेल देती है या जीवन में कुछ करने की हिम्मत देती है। उन्होंने कहा कि उर्दू में अहंकार नहीं है। कथाकार और पत्रकार हरीश पाठक ने भावुक होते हुए कहा कि जहीर कुरेशी मेरी जिंदगी के कातर क्षणों में चट्टान की तरह मेरे पीछे खड़े थे। उन्हें भूल पाना मेरे लिए असम्भव है।

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स्वामी स्नेहानन्द जी (सुधाकर स्नेह) ने जहीर कुरेशी की रचनाओं की सांगीतिक प्रस्तुति दी। डॉ तबस्सुम खान, ओबैद आजम आजमी ने भी अपने विचार रखे।स्वागत भाषण कमलेश पाठक, संचालन विवेक अग्रवाल व आभार दीनदयाल मुरारका ने व्यक्त किया। संयोजक हरीश पाठक व दीनदयाल मुरारका थे।

आलोक त्यागी-मान्यता (दुष्यंत कुमार के पुत्र, कमलेश्वर की पुत्री), ऋचा शरद (शरद जोशी की पुत्री), प्रख्यात व्यंग्यकार हरि जोशी, मंजू श्री, राजेन्द्र गौतम, सुदर्शना द्विवेदी, डॉ सत्यदेव त्रिपाठी, डॉ मधु बाला, प्रवीणा भारद्वाज, अभिनेत्री असीमा भट्ट, श्रुति भट्टाचार्य, प्रमिला शर्मा, महेंद्र मोदी, आभा दवे, प्रदीप गुप्ता, आसकरण अटल, संजय मासूम, अभिलाष अवस्थी, सुरभि मिश्र, सुषमा गुप्ता सहित कला, साहित्य, संस्कृति से जुड़े कई रचनाकार सभागार में मौजूद थे।