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दिगंबर जैन समाज द्वारा धूमधाम से मनाया जा रहा महापर्व दशलक्षण पर्व नवम दिन-धर्म-“उत्तम अकिंचन्य”

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रतलाम से रमेश सोनी की रिपोर्ट

आकिंचन्य का सीधा आशय अपरिग्रह से है।जरूरत जितना ही वस्तुओं का संग्रह करना अकिंचन्य है।आवश्यकता से अधिक किसी भी जीव-अजीव से मोह ना रखना ही अकिंचन्य होता हैं।हम अक्सर जरूरत से अधिक चीजों का संग्रह कर लेते हैं और फिर उन्हें देख कर कुछ दिन तक मान करते हैं फिर उनसे पीछा छुडाने का उपाय ढुंढते हैं।

इसी प्रक्रिया से बचने के लिए उत्तम अकिंचन्य धर्म का पालन करना सर्वोत्तम हैं।अतः अपनी आवश्यकताओं को सिमित करें।
जिस व्यक्ति ने अंतर बाहर 24 प्रकार के परिग्रहों का त्याग कर दिया है,वो ही परम समाधि अर्थात्‌ मोक्ष सुख पाने का हकदार होता हैं।
उक्त प्रवचन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय में पर्वाधीराज पर्युषण महापर्व के नवमें दिन “उत्तम आकिंचन्य”के अवसर पर उदयपुर से पधारे अतिथि विद्वान पंडित श्री राजकुमारजी “शास्त्री” ने कहीं।

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सकल दिगम्बर जैन समाज के उपाध्यक्ष किर्ति बडजात्या ने बताया कि प्रातःकाल की बेला में समाजजनों द्वारा सामूहिक जिनेन्द्र अभिषेक एवं सामुहिक पूजन का आयोजन किया गया, संगीत की सुमधुर स्वर लहरियों के साथ समाज के सभी लोगों ने विधानाचार्य श्री अक्षय जी जैन के सानिध्य में जिनेंद्र भगवान की सामूहिक पूजा की गई।

रात्रि को होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रंखला में श्रीमती आभा अजमेरा,श्रीमती अनु अजमेरा द्वारा भव्य आध्यत्मिक अंताक्षरी नामक धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया,जिसमे अनंत दर्शन-अनंत ज्ञान-अनंत सुख एवं अनंत वीर्य नामक 4 टीमों ने भाग लिया जिसमें विजेता टीम रही श्रीमती मंजू बड़जात्या,श्रीमती रश्मि जैन एवं श्रीमती रोशनी मोठिया की अनंत ज्ञान टीम रही।

पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन कल 09 सितंबर को सकल दिगंबर जैन समाज रतलाम का परंपरा अनुसार विशाल सामूहिक चल समारोह श्री आदिनाथ चैत्यालय-नवकार भवन,हनुमान रुंडी से दोपहर 2:30 बजे प्रारंभ होगा जो शहर के विभिन्न मार्गो से होता हुआ तोपखाना जैन मंदिर पहुंचेगा पश्चात वहां से पुनः आदिनाथ चैत्यालय पहुंचकर श्रीजी का अभिषेक होगा एवं जुलूस का समापन पुनः तोपखाना दिगम्बर मंदिर पर जिनेंद्र देव के सामूहिक अभिषेक के पश्चात होगा।

आदिनाथ गोठ के अध्य्क्ष राजकुमार अजमेरा एवं साठ घर की गोठ के अध्यक्ष कमलेश पापरीवाल ने सभी समाज जनों से चल समारोह में आने की अपील की हैं।