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Medical College Ragging : रैगिंग मामले में पुलिस ने 9 सीनियर छात्रों की पहचान की

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने चुप्पी साधी, कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी

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Indore : मेडिकल कॉलेज में रैगिंग मामले की जांच कर रही पुलिस को कॉलेज प्रबंधन ने 700 जूनियर्स डॉक्टरों की सूची सौंपी है। इनमें से करीब 100 छात्र ऐसे हैं, जो एमजीएम होस्टल से बाहर रहते हैं। इन्हें नोटिस देकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस ने ऐसे 9 सीनियर्स की पहचान की है, जिन पर रैगिंग लेने का पुख्ता संदेह है।

संयोगितागंज के TI तहजीब काजी ने बताया जो सबूत साक्ष्य मिले, उनके आधार पर रैगिंग लेने वाले आरोपी छात्रों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी ने 9 सीनियर छात्रों पर संदेह जताया है। कमेटी ने बताया कि इनके द्वारा ही रैगिंग ली जा रही थी, लेकिन पुलिस साक्ष्य जुटाकर जो मुख्य हैं उन्हें आरोपी बनाएगी। उल्लेखनीय है कि एमजीएम में रैगिंग को लेकर सनसनी फैल गई। प्रशासन ने भी इस शिकायत को गंभीरता से लिया और जांच शुरू कर दी।

मामला इसलिए और भी गंभीर रूप ले सकता है, क्योंकि शिकायत करने वाले जूनियर छात्रों ने शिकायत के साथ बकायदा टेक्निकल सबूत दिए हैं। मेडिकल कॉलेज में मिली रैगिंग की शिकायत के बाद संयोगितागंज थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की, तो कई अहम सबूत हाथ लगे हैं। इसमें 9 सीनियर छात्रों की पहचान हुई है, जो जूनियर को शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करते थे।

लेकिन, रैगिंग का खुलासा होने के बाद से ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने चुप्पी साध ली। अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई! लेकिन, यह कयास लगाए जा रहे हैं, कि इस बार रैगिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पीड़ित जूनियर मेडिकल छात्र ने सीनियर्स के खिलाफ कई ऐसे तकनीकी साक्ष्य जुटाए, जिन्हें नाकारा नहीं जा सकता। उसने इसकी शिकायत दिल्ली यूजीसी और वहां की एंटी रैगिंग कमेटी को की। इसके बाद जब मामला डीन तक पहुंचा तो तकनीकी साक्ष्यों के साथ पुलिस को जांच सौंप दी गई। संयोगितागंज थाना पुलिस ने मामले में जांच जारी होने का दावा किया है।

फ्लैट में बुलाकर प्रताड़ना

जूनियर की रैगिंग कॉलेज कैंपस में नहीं की जाती थी। बल्कि, सीनियर जूनियर को बाहर अलग-अलग लोकेशन पर बुलाते थे। उसकी लोकेशन उनके मोबाइल पर भेजी जाती थी। वहां पहुंचने के बाद उन्हें आपत्तिजनक कार्य करने को कहा जाता था। मना करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता। सीनियर जूनियर को रैगिंग के नाम पर बाहर किसी फ्लैट पर बुलाते थे। इस दौरान उनसे उनके मोबाइल ले लिए जाते थे। एक फ्लैट में एक से अधिक सीनियर छात्र होते, वहां जूनियर्स को अलग-अलग निर्देश दिए जाते थे।

जूनियर्स को मजबूरन आदेश का पालन करना होता था। कई बार उन्हें अपने कपड़े उतारकर अश्लील बातें करने और गालियां देने को भी मजबूर किया जाता। उनके साथ पढ़ने वाली छात्राओं के बारे में निजी बाते बताने को कहा जाता था। उनके नंबर मांगे जाते थे और फ्लैट पर आते वक्त हर बार क्लीन शेव करके आने को कहा जाता था। इसके साथ ही पीड़ितों को फ्लैट से निकलते वक्त हिदायत दी जाती थी कि जो यहां हुआ उसे यहीं भूल जाओ।