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Miracle of 2% Votes : दिल्ली में ‘आप’ का 2% वोट क्या खिसका उसकी 10 साल की सत्ता चली गई!

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Miracle of 2% Votes : दिल्ली में ‘आप’ का 2% वोट क्या खिसका उसकी 10 साल की सत्ता चली गई!

भाजपा का वोट शेयर इस बार 7% बढ़ा, लेकिन सीट 8 से बढ़कर 48 हुई!

New Delhi : आम आदमी पार्टी (आप) के सारे दावों को उलटते हुए भाजपा ने दिल्ली की सत्ता पर कब्जा जमा लिया। दस साल तक जिस अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने दिल्ली पर राज किया, उसे मतदाताओं ने तीसरी बार सत्ता संभालने का मौका नहीं दिया। आश्चर्य इस बात का कि भाजपा को भले ही ‘आप’ की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा सीटें मिली हों, पर दोनों के बीच वोट शेयर का अंतर सिर्फ 2% का है।

दरअसल, ये पूरा खेल भाजपा के माइक्रो मैनेजमेंट का है! भाजपा अपने प्रतिद्वंद्वी से सीटों की संख्या के मामले में मीलों आगे निकल गई। वहीं, कांग्रेस का वोट शेयर भी पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में 2% प्रतिशत बढ़ा। लेकिन, वह इसका उस तरह फायदा नहीं ले सकी, जो भाजपा को मिला। भाजपा को इस चुनाव में 45.56% और ‘आप’ को 43.57% वोट मिले। हालांकि, सीटों के मामले में 48 का आंकड़ा हासिल कर भाजपा काफी आगे निकल गई। वहीं, विधानसभा की 70 सीटों में से ‘आप’ के खाते में 22 सीटें आईं। भाजपा के इस प्रदर्शन से पार्टी के कार्यकर्ताओं में काफी जोश है।

इस बार ‘आप’ को 10% का नुकसान

2020 में हुए विधानसभा चुनाव में ‘आप’ ने 53.57% वोट हासिल कर 62 सीटें जीती थीं। जबकि, भाजपा को 38.51% वोट के साथ 8 सीटें ही मिली थीं। इस प्रकार भाजपा का वोट शेयर इस बार 7% बढ़ा है। जबकि, ‘आप’ को नुकसान 10% का हुआ। कांग्रेस को इस बार भी बड़ा नुकसान हुआ, उसे इस चुनाव में 6.34% वोट मिले।

सिखों, जाटों, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों और पूर्वांचलियों सहित विभिन्न क्षेत्रीय एवं सामाजिक-आर्थिक वर्गों के वोटरों के वर्चस्व वाले चुनावी क्षेत्रों में पैठ बनाने में भाजपा सफल रही। दिल्ली की 70 सदस्य वाली विधानसभा के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने 48 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, ‘आप’ को 22 सीट मिली। जबकि, कांग्रेस 2015 और 2020 के बाद एक बार फिर दिल्ली में कोई भी सीट जीतने में सफल नहीं रही।