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Mother’s Day 2025 :खुद के आंसू हँसी में छुपा जाती “माँ”

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Mother’s Day 2025 :खुद के आंसू हँसी में छुपा जाती “माँ”

माँ
माँ तो बच्चों की धुरी होती है,
जीवन भर उनके चारों ओर
घूमती रहती है — बेपरवाह सी।

दुख-दर्दों को
अपने आँचल में समेटे हुए,
कभी नहीं करती अपनी परवाह,
क्योंकि बच्चों की खुशियाँ ही
उसकी पूरी जिंदगी होती हैं।

ऊपर से डाँट लगाती है,
अंदर से माफ़ कर देती है।
हर बार, हर हाल में —
वो सिर्फ माँ ही हो सकती है।

थक जाती है, पर थकना नहीं दिखाती,
खुद के आंसू हँसी में छुपा जाती।
नींद उसकी तो बच्चों की करवट से बंधी होती है,
और भूख… बच्चों के तृप्त पेट से सजी होती है।

अपने सपनों को
कभी बच्चों की ज़रूरतों में बदल देती है,
अपने अधूरे ख्वाबों को
उनकी कामयाबी में जी लेती है।

माँ —
न कोई उपमा, न कोई तुलना,
वो तो बस माँ होती है…
ईश्वर का सबसे पवित्र रूप,
जो हर रूप में बस प्रेम ही देती है।
मिसिंग यू आई……..

सुरेखा सरोदे,इंदौर

Mother’s Day : माँ पर अनिता नाईक और साधना शर्मा की कविता 

Deteriorating Handwriting : पंडित दीनानाथ व्यास स्मृति प्रतिष्ठा समिति द्वारा बच्चों की लिखावट खराब हो रही है -कारण और समाधान’ विषय पर परिसंवाद