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MP News: कल्दा वन धन विकास केंद्र बना आदिवासी महिला सशक्तिकरण का मॉडल

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MP News: कल्दा वन धन विकास केंद्र बना आदिवासी महिला सशक्तिकरण का मॉडल

गणेश पांडे की रिपोर्ट 

भोपाल । दक्षिण पन्ना वनमण्डल अंतर्गत संचालित कल्दा वन धन विकास केंद्र (VDVK) ने वर्ष 2025-26 में जनजातीय आजीविका संवर्धन, महिला सशक्तीकरण एवं लघुवनोपज आधारित उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में पहचान बनाई है। केंद्र द्वारा इस वर्ष लगभग ₹21.4 लाख का रिकॉर्ड राजस्व एवं लगभग ₹5 लाख का लाभ अर्जित किया गया, जो पिछले तीन वर्षों के औसत की तुलना में राजस्व में 400 प्रतिशत से अधिक तथा लाभ में 800 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है।

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पूर्व वर्षों में केंद्र का राजस्व एवं लाभ क्रमशः वर्ष 2021-22 में ₹6.5 लाख एवं ₹17 हजार, वर्ष 2022-23 में ₹4.7 लाख एवं ₹67 हजार, वर्ष 2023-24 में ₹2.6 लाख एवं ₹63 हजार तथा वर्ष 2024-25 में ₹5.1 लाख एवं ₹22 हजार रहा था। यह वृद्धि स्थानीय संग्राहकों को बेहतर मूल्य, गुणवत्तापूर्ण प्रसंस्करण एवं प्रभावी विपणन रणनीतियों का परिणाम मानी जा रही है।

*बिचौलियों पर निर्भरता हुई कम*

वन धन विकास केंद्र कल्दा के माध्यम से स्थानीय आदिवासी संग्राहकों को लघुवनोपज का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी अधिक प्राप्त हो रहा है। उदाहरणस्वरूप अचार/चिरौंजी चरवा का समर्थन मूल्य ₹130 प्रति किलोग्राम निर्धारित है, जबकि गुणवत्ता के आधार पर संग्राहकों को वन धन केंद्र के माध्यम से लगभग ₹160 से ₹180 प्रति किलोग्राम तक मूल्य प्राप्त हुआ। बाद में इसी उपज का प्रसंस्करण, डीसीडिंग, सफाई एवं आकर्षक पैकेजिंग कर “कल्दा चिरौंजी” ब्रांड के रूप में विपणन किया गया। इस पहल से स्थानीय संग्राहकों की आय में वृद्धि हुई है तथा बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है।

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*आदिवासी महिलाओं को बढ़ा आर्थिक संबल*

वन धन विकास केंद्र की गतिविधियों से विशेष रूप से आदिवासी महिला सदस्यों को बड़ा आर्थिक संबल प्राप्त हुआ है। कई महिला सदस्य, जिन्हें पूर्व में कोई आय प्राप्त नहीं होती थी, वे वर्तमान में वन धन केंद्र से जुड़कर लगभग ₹5000 प्रतिमाह तक आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि क्षेत्र में आदिवासी महिला सशक्तीकरण को भी नई दिशा मिली है।

*रोजगार एवं आय के अवसरों में वृद्धि* 

वर्ष 2025-26 में केंद्र को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तब प्राप्त हुई जब JK Cement के साथ CSR साझेदारी स्थापित हुई, जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ियों एवं विद्यालयों हेतु महुआ लड्डुओं की नियमित मासिक आपूर्ति सुनिश्चित की गई। इससे वन आधारित उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध हुआ तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसरों में वृद्धि हुई। कल्दा वन धन विकास केंद्र द्वारा चिरौंजी, प्राकृतिक शहद, महुआ लड्डू, आंवला आधारित उत्पाद, त्रिफला चूर्ण, दहीमन, सूखा आंवला, बाल हर्रा एवं बहेड़ा छिलका जैसे विविध लघुवनोपज आधारित उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं। उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं पोषणीय मानकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। वर्ष 2025-26 में केंद्र के अधिकांश प्रमुख उत्पादों का एफएसएसएआई मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण कराया गया, जिसमें उनकी उच्च गुणवत्ता, शुद्धता एवं पोषणीय मूल्य की पुष्टि हुई।

*लैब टेस्ट में खरा उतरा पन्ना का शहद*

परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक शहद में HMF शून्य तथा Fiehe’s Test निगेटिव पाया गया, जिससे यह प्रमाणित हुआ कि शहद ताजा एवं बिना किसी चीनी मिलावट के है। इसी प्रकार चिरौंजी में उच्च ऊर्जा, प्राकृतिक वसा एवं प्रोटीन पाए गए, जबकि ट्रांस फैट एवं कोलेस्ट्रॉल अनुपस्थित रहे। महुआ लड्डुओं में संतुलित पोषणीय तत्व पाए गए तथा उनमें किसी भी प्रकार के हानिकारक पदार्थ, कृत्रिम रंग अथवा मिलावट की अनुपस्थिति दर्ज की गई।