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इसके बाद परिजन इलाज के लिए अस्पताल जाने की बजाय उन्हें ग्राम सिमरदा ले गए, जहां झाड़-फूंक कराई गई। वहां कोई फायदा नहीं हुआ तो अन्य जगहों पर भी झाड़-फूंक का सहारा लिया गया।
करीब एक दिन तक अलग-अलग स्थानों पर झाड़-फूंक कराने के बाद जब उनकी हालत गंभीर हो गई तो परिजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
डॉक्टर बोले- झाड़-फूंक नहीं, तत्काल इलाज कराएं
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. राजकुमार अवस्थी ने कहा कि बारिश के मौसम में सांप समेत अन्य जहरीले जीव-जंतु अधिक निकलते हैं। ऐसे मामलों में अंधविश्वास या झाड़-फूंक के भरोसे समय बर्बाद करना जानलेवा साबित हो सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो उसे बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल पहुंचाएं। समय पर एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) और आवश्यक उपचार मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी यदि समय रहते अस्पताल पहुंचाया जाता तो जान बचने की संभावना अधिक थी।
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