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MP की जेलों में बंद है क्षमता से 47 प्रतिशत ज्यादा बंदी,केंद्रीय जेलों में 800 महिला बंदियों की जगह है 1250 

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MP की जेलों में बंद है क्षमता से 47 प्रतिशत ज्यादा बंदी,केंद्रीय जेलों में 800 महिला बंदियों की जगह है 1250 

भोपाल: प्रदेश की केंद्रीय, जिला एवं सब जेल में क्षमता से अधिक बंदी रखे गए हैं। हालात यह है कि क्षमता से 47 फीसदी से ज्यादा जेलों में बंद हैं। इनमें केंद्रीय जेलों में बंद महिलाएं की संख्या में क्षमता से पचास फीसदी से ज्यादा है। प्रदेश में 45 हजार से ज्यादा बंदी जेलों में हैं। प्रदेश में कुछ जेलों को निर्माण कार्य चल रहा है, इसमें छिंदवाड़ा और इंदौर के जेल शामिल हैं। अभी 9 बैरक भी निर्माणाधीन है।

प्रदेश की जेलों में महिला और पुरुषों रखे जाने की क्षमता तय है। प्रदेश के 11 केंद्रीय जेलों में जहां 14 हजार 306 पुरुष बंदी रखे जाने की क्षमता है, वहीं यहां पर महिलाओं को रखे जाने की क्षमता 790 हैं। इस तरह कुल 15 हजार 96 बंदियों को रखा जा सकता है। क्षमता के विपरित यहां पर 24 हजार 901 बंदी हैं। इसमें पुरुषों की संख्या 23 हजार 650 है जबकि महिला बंदियों की संख्या 1251 हैं। यहां पर क्षमता से 50 फीसदी महिलाओं को रखा गया है। हालांकि जिला जेलों में महिलाओं की संख्या उन्हें रखे जाने की क्षमता से कम है। प्रदेश की 41 जिला जेलों में महिला बंदियों की क्षमता 758 है, इन जेलों में 666 महिला बंदी हैं। जबकि पुरुष बंदियों को रखे जाने की क्षमता 9251 है और यहां पर 13 हजार बंदी हैं। इसी तरह प्रदेश की कुल 73 सब जेलों में 4962 पुरुष और 439 महिला बंदी रखे जाने की क्षमता है। जबकि 6 हजार 394 पुरुष और एक महिला बंदी इन जेलों में बंद हैं।

बंदियों की संख्या हर साल हो रही कम

पिछले तीन सालों में बंदियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। एक समय ऐसा था जब प्रदेश की इन जेलों में 48 हजार 857 बंदी हुआ करते थे। यह स्थिति 31 दिसंबर 2022 में थी, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या घट कर 45 हजार 543 हो गई। अब 31 दिसंबर 2023 में यह संख्या कम हो कर 45092 पर आ गई है।