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Next National President of BJP : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए 3 नाम सामने आए, पर संकेत राम माधव की ताजपोशी के!

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Next National President of BJP : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए 3 नाम सामने आए, पर संकेत राम माधव की ताजपोशी के!

भाजपा राम माधव की काबिलियत से वाकिफ, वे विश्वसनीय और सफल रणनीतिकार!

‘मीडियावाला’ के स्टेट हेड विक्रम सेन की एक्सक्लूसिव राजनीतिक रिपोर्ट

New Delhi : भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की। लेकिन, सूत्रों का कहना है कि आंतरिक विचार-विमर्श चल रहा है और औपचारिक प्रक्रिया जून के मध्य तक शुरू हो सकती है। माना जा सकता है कि इसी माह अंत तक नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो सकता है।

वैसे तो पार्टी अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में है। लेकिन, जो नाम हाल ही में बड़ी तेजी से अंदर ही अंदर चर्चा में आया है वह है राम माधव। वैसे तो राम माधव पिछले सालों में संघ में ही सक्रिय थे और पार्टी की मुख्य धारा से दूर थे लेकिन पिछले साल उनकी एक तरह से घर वापसी हुई और वे वापस मुख्य धारा में लौटे और उन्हें जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जवाबदारी दी थी। उन्हें जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रभारी बनाया गया था। दरअसल यह उनका पुराना ही असाइनमेंट था जो नए टास्क के रूप में उन्हें दिया गया था क्योंकि पिछली बार भले ही गठबंधन की ही सही, राम माधव ने ही बीजेपी की सरकार जम्मू कश्मीर में बनवाई थी।

पिछले साल पार्टी में वापसी के बाद राम माधव फिर से लगातार सक्रिय राजनीति में हैं।

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भाजपा ने अधिकांश राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे कर लिए हैं, जो अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले पार्टी संविधान के तहत एक आवश्यक पूर्व शर्त है। उत्तर प्रदेश में 70 जिला अध्यक्षों की हाल ही में हुई घोषणा ने इस अटकल को और हवा दे दी है कि केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही भाजपा अध्यक्ष पद पर फैसला ले सकता है। हालांकि, कहा जा रहा है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर इस प्रक्रिया में कुछ देरी हुई है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर नियुक्ति से पहले भाजपा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड सहित प्रमुख राज्यों में नए राज्य इकाई अध्यक्षों के नाम को अंतिम रूप दे सकती है। राज्य स्तरीय पुनर्गठन पहले उत्तर प्रदेश में, जहां जातिगत समीकरण अहम हैं, पहले ब्राह्मण चेहरे पर विचार किया जा रहा था। पार्टी के एक वर्ग में ओबीसी नेता की मांग बढ़ रही है।

मध्य प्रदेश में मौजूदा नेतृत्व संरचना में एक ओबीसी मुख्यमंत्री और एक ब्राह्मण राज्य अध्यक्ष है। यह संतुलन अब तक पार्टी के लिए कारगर रहा। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब राज्य प्रमुख के रूप में एक आदिवासी नेता को नियुक्त करने पर विचार कर रही है। क्योंकि, मौजूदा राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व में आदिवासियों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है। उत्तराखंड में एक ब्राह्मण नेता को प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जहां राज्य स्तरीय समीकरणों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, वहीं पार्टी हलकों में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों के नामों पर चर्चा शुरू हो गई है।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में 3 प्रमुख दावेदार

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, ओडिशा के एक प्रमुख ओबीसी नेता जो अपने संगठनात्मक कौशल और केंद्रीय नेतृत्व से निकटता के लिए जाने जाते हैं, पार्टी के अध्यक्ष पद की दौड़ में प्रमुख नेताओं में से एक हैं। दूसरे, लशिवराज सिंह चौहान भी एक शीर्ष दावेदार के रूप में उभरे हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और अब केंद्रीय मंत्री, उन्हें जमीनी स्तर का अनुभव रखने वाले एक जन नेता के रूप में देखा जाता है। मनोहर लाल खट्टर जो हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री से केंद्रीय मंत्रिमंडल में आए हैं, निरंतरता और प्रशासनिक अनुभव का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इसलिए, कहा जा रहा है कि वह उन तीन बड़े नामों में से एक हैं, जिन्हें भाजपा चुन सकती है। इन तीनों प्रमुख नेताओं के नाम के बाद भी बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सूत्र राम माधव के नाम की ओर ही संकेत दे रहे है।

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राम माधव भाजपा के सफल रणनीतिकार

मूलतः आंध्र प्रदेश के रहने वाले 60 वर्षीय माधव इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर की डिग्री हासिल कर चुके हैं। वह 20 साल की उम्र में पहुंचने से पहले ही आरएसएस के प्रचारक बन गए थे। उन्होंने संघ के अंदर अपनी छवि को इस तरह का बनाया कि वह उनको दिए गए हर एक मिशन को पूरा करके ही मानते थे।

राम माधव को साल 2003 में एमजी वैद्य की जगह संघ का प्रवक्ता बनाया गया था। वैद्य, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को बार-बार अपने बयानों से घेरते रहते थे। ऐसे में माधव को प्रवक्ता की कमान सौंपी गई। प्रमोद महाजन की तरह माधव भी बड़े-बड़े मामलों में बड़ी सफाई और विश्वसनीयता से संघ का पक्ष रखते थे। राम माधव 2014 में संघ से बीजेपी की सक्रिय राजनीति में बड़ी खामोशी से आए थे, इसी समय अमित शाह को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया, तब माधव को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया था।

वे अंतर्राष्ट्रीय मामलों में भी अपनी अच्छी खासी पहुंच रखते थे। पीएम मोदी की सरकार के शुरुआती दिनों में उनकी विदेश यात्राओं में माधव के सुझावों को भी काफी अहमियत दी जाती थी। राम माधव ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के निर्देश पर पार्टी के एजेंडे धारा 370 को ख़त्म करने और जम्मू-कश्मीर में अनुकूल माहौल बनाने के लिए जमीनी स्तर पर जमकर मेहनत की। इसके बाद पूर्वोत्तर में चुनावों में काफी हद तक मदद की।

माधव असम में तरुण गोगोई का किला ध्वस्त करने में कामयाब रहे। असम में पहली बार न केवल बीजेपी की सरकार बनी बल्कि हिमंत बिस्वा सरमा जैसे कांग्रेस के अहम नेता को राम माधव ने अपने पाले में किया। आज की तारीख में असम और मणिपुर में बीजेपी के मुख्यमंत्री हैं। इसके साथ ही नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी सरकार में सहयोगी पार्टी है। इसके साथ ही पार्टी ने त्रिपुरा में भी उन्हीं के संगठनात्मक सूझबूझ से पहली बार लाल का किला उखाड़ने में कामयाबी पाई और यहां पर वामपंथी के शासन को उखाड़ फेंका था। वह पार्टी में जल्द ही एक फेमस चेहरा बनकर सामने आए।

संघ का 100 साल पुराना ड्रेस कोड बदलवाना माधव की सोच

संघ की 100 साल पुरानी ड्रेस कोड को बदलवाने का श्रेय भी माधव को ही जाता है। उनका मानना था कि संघ को आधुनिकता पर जोर देते हुए अपने विचारों के साथ काम करना होगा। ताकि टीवी और इंटरनेट वाली नई पीढ़ी को आकर्षित किया जा सके। माधव ने ही अपने शीर्ष नेताओं की नापसंदगी के बावजूद इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) को अपनाया। आज संघ प्रमुख मोहन भागवत का अपना ट्विटर एकाउंट है।

सूत्रों के मुताबिक माधव जिस तेजी से उभर रहे थे कि उनके विकास से अनेक लोग ज्यादा खुश नहीं थे। जनवरी 2020 में जब जगत प्रकाश नड्डा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए गए तब उनकी टीम में माधव को जगह नहीं मिली। वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जनवरी 2020 से इस पद पर हैं। 2024 के आम चुनावों तक पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ाया गया था। अब जब यह जनादेश पूरा हो गया है, तो नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं ने गति पकड़ ली है।

चुनाव प्रक्रिया की देखरेख के लिए एक केंद्रीय चुनाव समिति गठित किए जाने की संभावना है, जिसमें नामांकन दाखिल करना, जांच करना और यदि आवश्यक हो तो मतदान भी शामिल होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि नड्डा दूसरा पूर्ण कार्यकाल चाहेंगे या पार्टी कोई नया चेहरा चुनेगी और वह नया चेहरा कौन होगा, शायद राम माधव या कोई और!