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एक्सीडेंट के प्रकरण में DFO टीकमगढ़ राजाराम परमार के विरूद्ध FIR के आदेश

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एक्सीडेंट के प्रकरण में DFO टीकमगढ़ राजाराम परमार के विरूद्ध FIR के आदेश

भोपाल। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रियंक दुबे ने एक्सीडेंट के एक प्रकरण में डीएफओ टीकमगढ़ राजाराम परमार के विरूद्ध FIR करने का आदेश दिया है। माननीय न्यायालय द्वारा निष्कर्ष निकाला गया कि डीएफओ द्वारा साक्ष्य का विलोपन किया गया है, क्योंकि वाहन डीएफओ के आधिपत्य में ही था और उनके निर्देश पर ही वाहन को ठीक कराकर साक्ष्य का विलोपन किया गया है। अतः प्रकरण में DFO राजाराम परमार को साक्ष्य विलोपन किये जाने के संबंध में आरोपी बनाते हुए चालान पेश किये जाने का निर्देश दिए गए हैं।

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टीकमगढ़ के सहायक अभियोजन अधिकारी ने बताया कि मामला इस प्रकार है कि फरियादी लक्ष्मन आदिवासी पिता स्व. बंशी आदिवासी उम्र 40 वर्ष निवासी ग्राम मोहनपुरा द्वारा थाना कोतवाली टीकमगढ़ में मौखिक रिपोर्ट की कि दिनांक 22 जुलाई 25 को शाम 7 बजे फरियादी ने अपनी दो गायें घर के आस पास चरने के लिये छोड़ दी थीं। तभी दिनांक 23 जुलाई 25 के रात करीब 2 बजे एक चार पहिया वाहन का चालक तेज गति व लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए आया और फरियादी की दोनों गायों को टक्कर मार दी जिससे एक गाय की मौके पर ही मौत हो गई और दूसरी गाय को चोटें आई थीं।

चार पहिया वाहन की नंबर प्लेट क्र. एम. पी. 02 जेड ए 1255 टूटकर सड़क पर गिर गई थी। फरियादी द्वारा चार पहिया वाहन एम. पी. 02 जेड ए 1255 के चालक के विरूद्ध रिपोर्ट की गई थी। दौरान विवेचना पुलिस द्वारा घटना स्थल पर जाकर उक्त वाहन की नंबर प्लेट जप्त की गई, जिस पर रजिस्ट्रेशन नंबर एम.पी. 02 जेड ए 1255 एवं डीएफओ लिखा था।

वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर वन विभाग डीएफओ टीकमगढ़ को वाहन चालक के संबंध में नोटिस देकर जानकारी प्राप्त की गई, जिसके प्रतिउत्तर में बताया गया कि घटना दिनांक को चालक रवि तनय पूरनलाल कुशवाहा निवासी – मामोन दरवाजा उक्त वाहन को चला रहा था और यह भी लेख किया कि दुर्घटना के समय गायें पूर्णतः स्वस्थ थीं।

इसी कारण वाहन को मरम्मत हेतु चालक रवि कुशवाहा के माध्यम से भेजा गया था। वाहन को घटना दिनांक से करीब डेढ़ माह बाद चालक रवि कुशवाहा थाना कोतवाली में लेकर उपस्थित हुआ तब उस वाहन में कोई क्षति नहीं थी, जिसको पुलिस द्वारा जप्त किया गया।

प्रकरण में माननीय न्यायालय द्वारा डीएफओ से घटना के तुरंत पश्चात वाहन की मरम्मत करने के संबंध में जबाब लिया गया जिसमें उनके द्वारा स्वीकार किया गया कि उन्होंने वाहन की मरम्मत किये जाने हेतु भेजा था एवं शासन की ओर से भी पक्ष रखा गया।

जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा निष्कर्ष निकाला गया कि जिला वन मण्डलाधिकारी द्वारा साक्ष्य का विलोपन किया गया है क्योंकि वाहन जिला वन मण्डलाधिकारी के आधिपत्य में ही था और उनके निर्देश में ही वाहन को ठीक कराकर साक्ष्य का विलोपन किया गया है। अतः प्रकरण में राजाराम परमार जिला वन मण्डलाधिकारी को साक्ष्य विलोपन किये जाने के संबंध में चालान पेश किये जाने का निर्देश न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट टीकमगढ़ श्री प्रियंक दुबे द्वारा थाना कोतवाली टीकमगढ़ को दिया गया गया।