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Patwari Exam Controversy: जनहित याचिका पर हुई सुनवाई, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

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Patwari Exam Controversy: जनहित याचिका पर हुई सुनवाई, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

  इंदौर: मध्य प्रदेश में बहुचर्चित पटवारी चयन कंट्रोवर्सी को लेकर मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। इंदौर में इस संबंध में दायर जनहित याचिका में आज एमपी हाईकोर्ट की युगल पीठ में 32 मिनट तक चली बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।

 हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका रघुनंदनसिंह परमार ने दायर की थी। उनकी ओर से सीनियर एडवोकेट अमित उपाध्याय, रोहित शर्मा और जीपी सिंह पैरवी कर रहे हैं। गौरतलब है कि कर्मचारी चयन मंडल ने पटवारी संयुक्त भर्ती परीक्षा में आयोजित की थी। इस परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद से ही परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं। विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ने इस परीक्षा से होने वाली नियुक्तियों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है।

हाई कोर्ट में प्रस्तुत याचिका में कहा गया था कि परीक्षा का परिणाम गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है। परीक्षा परिणाम से स्पष्ट है कि दस टॉपर में से सात टॉपर ग्वालियर के एक ही कालेज से हैं। यह कालेज भाजपा के भिंड विधायक का है। गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद परीक्षा से होने वाली भर्तियों पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में वे अभ्यर्थी जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी थी, वे खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। जिन ईमानदार अभ्यर्थियों का चयन हो गया है, उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है क्योंकि परीक्षा के आधार पर होने वाली नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। एक ही कालेज से आने वाले सात टाॅपरों के रोल नंबर एक ही सीरीज के हैं। यह बात भी शंका खड़ी करती है कि सभी टॉपरों ने हिंदी में हस्ताक्षर किए है।