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Pension Politics : मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो पुरानी पेंशन मिलेगी!

विधानसभा चुनाव में 'पुरानी पेंशन' का मुद्दा बनना लगभत तय

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Bhopal : 2023 में कांग्रेस की सरकार बनी तो पुरानी पेंशन योजना लागू की जाएगी। यह घोषणा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने की। कमलनाथ मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने यह घोषणा की। इससे पहले दो अन्य कांग्रेस शासित राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी पुरानी पेंशन योजना लागू करने की घोषणा हो चुकी है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमलनाथ ने कहाकि पुरानी पेंशन योजना में आप कांग्रेस की भावना समझते हैं। इसके बाद उन्होंने कहाकि स्वाभाविक है कि जो बाकी कांग्रेस शासित स्टेट्स में लागू है, वो मध्य प्रदेश में भी लागू होगा। सबसे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वहां पर पुरानी पेंशन योजना लागू की थी। इसके कुछ ही दिनों के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी वहां पर पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का ऐलान कर दिया था।

सत्ता के लिए लगा रहे जोर
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान तीनों ही राज्यों में 2023 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में राजनीतिक दल इन राज्यों से जुड़ी घोषणाओं पर जोर दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में जहां कांग्रेस सत्ता बचाए रखने के लिए प्रयासरत है, वहीं मध्य प्रदेश में उसकी कोशिश फिर से बहुमत पाने की है।

यह तय माना जा रहा है, कि सरकारी कर्मचारियों की पेंशन 2023 के विधानसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा बनेगा। प्रदेश के सरकारी कर्मचारी ओल्ड पेंशन स्कीम फिर से लागू करने की मांग कर ही रहे हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस भी खुलकर इसके समर्थन में आ गई। मध्यप्रदेश में अप्रैल 2005 में पुरानी पेंशन योजना को बंद करके नई पेंशन योजना लागू की गई थी। कांग्रेस शासन वाले राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ओल्ड पेंशन स्कीम लागू की जा चुकी है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि न्यू और ओल्ड पेंशन स्कीम में मुख्य अंतर क्या है और इससे कितने कर्मचारियों को फायदा होगा।

बेसिक सैलरी में 10% कटौती
नई पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारी के मूल वेतन से 10% राशि काटी जाती है। उसमें सरकार 14% अपना हिस्सा मिलाती है। पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी की सैलरी से कोई कटौती नहीं होती थी। पुरानी पेंशन योजना में रिटायर्ड कर्मचारियों को सरकारी कोष से पेंशन का भुगतान किया जाता था। वहीं, नई पेंशन योजना शेयर बाजार आधारित है और इसका भुगतान बाजार पर निर्भर करता है।

GPF और पेंशन
पुरानी पेंशन योजना में जीपीएफ (General Provident Fund) की सुविधा होती थी। लेकिन, नई स्कीम में यह नहीं है। पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के समय की सैलरी की करीब आधी राशि पेंशन के रूप में मिलती थी। नई पेंशन स्कीम में निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं है।

DA और ग्रैच्युटी
पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायर्ड कर्मचारियों को भी हर छह महीने में मिलने वाला महंगाई भत्ता मिलता था। नई स्कीम में इसकी व्यवस्था नहीं है। पुरानी पेंशन स्कीम में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय 20 लाख रुपये तक की ग्रैच्युटी मिलती थी। नई पेंशन स्कीम में ग्रैच्युटी का अस्थाई प्रावधान है।

GPF पर ब्याज
पुरानी योजना में कर्मचारी की मौत पर उसके परिजनों को भी पेंशन मिलती थी। नई पेंशन स्कीम में भी कर्मचारी की मौत पर परिजनों को पेंशन मिलती है, लेकिन योजना में जमा पैसा सरकार ले लेती है। पुरानी पेंशन योजना में जीपीएफ के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगता था, लेकिन नई स्कीम में शेयर बाजार की गति के आधार पर जो पैसा मिलता है, उस पर टैक्स भी देना पड़ता है।

40% रकम सरकार के पास
पुरानी स्कीम में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय GPF में कोई निवेश नहीं करना होता था। नई स्कीम में 60% फंड रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को मिल जाता है। बाकी 40% सरकार निवेश करती है और उसके आधार पर हर महीने की पेंशन मिलती है।