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Rarest of the Rare Case: जादू-टोने के शक में नृशंस हत्या-आरोपी को फांसी की सजा, Khandwa District Court का बड़ा फैसला 

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Rarest of the Rare Case: जादू-टोने के शक में नृशंस हत्या-आरोपी को फांसी की सजा, Khandwa District Court का बड़ा फैसला 

खंडवा: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में हुई एक दिल दहला देने वाली हत्या के मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने पड़ोसी की गर्दन काटकर हत्या करने वाले आरोपी चंपालाल उर्फ नंदू मेहर को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी अत्यंत दुर्लभ श्रेणी का अपराध बताया है। यह फैसला न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने सुनाया, जिसने कहा कि आरोपी की बर्बरता मानवता के लिए खतरा है और समाज में भय का वातावरण उत्पन्न करती है।

**मामला: जादू-टोने के शक में उतारा मौत के घाट**

यह जघन्य घटना 12 दिसंबर 2024 की रात खंडवा जिले के पंधाना थाना क्षेत्र के छनेरा गांव में हुई थी। मृतक रामनाथ बिलोटिया अपने घर के बाहर थे, तभी पड़ोसी नंदू मेहर वहां पहुंचा और आरोप लगाने लगा कि वह उस पर “जादू-टोना” करता है। देखते ही देखते आरोपी ने पास रखी कुल्हाड़ी से रामनाथ पर हमला कर दिया। वार इतना भयावह था कि उसने उनकी गर्दन धड़ से अलग कर दी।

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मृतक की पत्नी शांतिबाई ने भयभीत होकर यह दृश्य अपनी आंखों से देखा। उन्होंने बताया कि आरोपी वारदात के बाद शव के पास खड़ा होकर चिल्ला रहा था- “जो पास आएगा, उसे भी काट दूंगा।” गांव में अफरा-तफरी मच गई और सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची।

**जांच में पुख्ता सबूत, फॉरेंसिक रिपोर्ट ने खोले राज**

पुलिस ने आरोपी को घटनास्थल से गिरफ्तार किया और कुल्हाड़ी, मृतक का सिर व आरोपी के खून से सने कपड़े जब्त किए। फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि कपड़ों और हथियार पर पाया गया रक्त मृतक का ही था।

मामले की विवेचना उपनिरीक्षक रामप्रकाश यादव ने की, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से विनोद कुमार पटेल ने पैरवी की।

**अदालत का फैसला: “मानवता को झकझोर देने वाला अपराध”**

मामले की सुनवाई के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने माना कि हत्या की यह वारदात “नृशंसता की पराकाष्ठा” है और आरोपी में किसी प्रकार की पश्चाताप भावना नहीं दिखी।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा

“यह अपराध न केवल समाज के लिए भय का कारण है, बल्कि मानवता को भी शर्मसार करता है। ऐसी स्थिति में दया का कोई औचित्य नहीं बनता।”

इस आधार पर अदालत ने आरोपी को “मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाने” की सजा सुनाई।

**आगे की प्रक्रिया और प्रतिक्रियाएं**

अदालत का यह फैसला अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद आरोपी को उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में अपील का अवसर रहेगा।

मृतक की पत्नी शांतिबाई ने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा, “मेरे पति की निर्मम हत्या का दर्द मैं कभी नहीं भूल सकती, लेकिन अब न्याय मिला है।”

पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय ने अभियोजन टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह फैसला समाज के लिए नज़ीर बनेगा और अंधविश्वास के नाम पर हिंसा करने वालों को सख्त संदेश देगा।

**सामाजिक संदेश**

यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि अंधविश्वास और मानसिक अंधकार की त्रासदी को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जादू-टोना जैसी धारणाओं को मिटाने और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है।

खंडवा की अदालत का यह फैसला न सिर्फ न्याय व्यवस्था की सख्ती का प्रतीक है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि समाज में किसी भी बहाने से की गई बर्बरता को बख्शा नहीं जाएगा। कानून सबके लिए समान है, और अंधविश्वास की आड़ में की गई हत्या को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में गिना जाएगा।