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शंकराचार्य विवाद में इस्तीफा: CM YOGI के समर्थन में GST डिप्टी कमिश्नर ने छोड़ा पद

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शंकराचार्य विवाद में इस्तीफा: CM YOGI के समर्थन में GST डिप्टी कमिश्नर ने छोड़ा पद

Ayodhya-Lucknow: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तैनात जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की हालिया टिप्पणियों के विरोध और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। इस कदम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

● क्या है पूरा मामला

प्रशांत कुमार सिंह ने अपने त्यागपत्र में कहा है कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी उन्हें अपमानजनक और अस्वीकार्य लगी। उनका कहना है कि एक संवैधानिक पद पर रहते हुए वे ऐसे बयानों को मौन रहकर स्वीकार नहीं कर सकते थे।

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आत्मसम्मान के आधार पर लिया निर्णय

इस्तीफे में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी दबाव या राजनीतिक निर्देश में नहीं लिया गया है, बल्कि यह पूरी तरह आत्मसम्मान और नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर है। उन्होंने कहा कि वे संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनी हुई सरकार के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं।

राज्यपाल को सौंपा गया त्यागपत्र

जानकारी के अनुसार प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को संबोधित किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि इस्तीफा स्वीकार होने तक वे अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।

प्रशासनिक सेवा में हलचल

एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा इस तरह सार्वजनिक रूप से कारण बताते हुए इस्तीफा देने से प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है। अधिकारी वर्ग में इसे व्यक्तिगत आस्था, वैचारिक प्रतिबद्धता और प्रशासनिक निष्पक्षता के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है।

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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज

इस इस्तीफे को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। समर्थक इसे साहसिक और आत्मसम्मान से जुड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ वर्ग इसे प्रशासनिक सेवा की मर्यादा से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।

शंकराचार्य विवाद से जुड़ा मामला

उल्लेखनीय है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की हालिया टिप्पणियों को लेकर पहले से ही धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर विवाद चल रहा है। अब एक प्रशासनिक अधिकारी का इस्तीफा इस विवाद को और व्यापक बहस के केंद्र में ले आया है।

यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक सेवा, अभिव्यक्ति, आस्था और संवैधानिक मर्यादा जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।